Maker Sankranti: मकर संक्राति के दिन सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है मकर संक्रांति के दिन से उत्तरायण की शुरुआत होती है इसे उत्तरायण इसलिये भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य की किरणें दक्षिण दिशा में तेजी से जाने के बाद उत्तर दिशा में वापस लौटने लगती है। इस लिये मकर संक्रांति के दिन भगवान शिव, विष्णु जी के अलावा पितरों की भी विधि विधान से पूजा करने का प्रावधान है। यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनिदेव से मिलने के लिये आते है। इसलिये तिल के लड्डू के दान करने एंव तिल गुड़ के लड्डू को खाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति के दिन गंगाजल से स्नान करने के उपरान्त तांबे के लोटे में रोली चावल मिलाकर सूर्यदेव को जल अर्पित करने से जीवन में ऐश्वर्य और सुख की प्राप्ति होती है। देवताओं में भगवान विष्णु को सबसे अधिक प्रिय है सलिये इस दिन खिचड़ी का दान सर्वाधिक पुण्य देने वाला होता है। खिचड़ी को सात्विक भोजन के रुप में भी सबसे उपयुक्त आहार माना गया है जिसके कारण मकर संक्रांति के पावन पर्व के अवसर पर हिन्दू धर्म में सभी घरों में खिचड़ी को घी के साथ भोजन के रुप में ग्रहण किया जाता है। मकर संक्रांति में तिल और गुड़ से बनी चीजों का दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

