VEDAS: हिंदू धर्म के आधार सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये वेदों की रचना ऋषि मुनियों द्वारा की गई और वेदों में ईश्वर, चिकित्सा, गणित, ज्योतिष के साथ अन्य कई विषयों का ज्ञान समाहित है। माना जाता है कि यह ज्ञान ईश्वर द्वारा ऋषि मुनियों को दिये जाते गये थे और ऋषि मुनियों ने उस ज्ञान को वेदों में वर्णित किया है। इन सभी वेदों का संकलित करने का श्रेय महर्षि द्वैपायन को प्राप्त है इन्हें वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है।
वेदा ब्रह्मात्मविषयास्त्रिकाण्डविषाया इमे
(वेद ब्रह्मा और आत्मा तथा त्रिकाण्ड के बारे में ज्ञान देते हैं)
जायते म्रियते वा विपश्चिन्नायं कुतश्चिन्न बभूव कश्चित्।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे ।।
(आत्मा का न जन्म होता है न मरण; न यह आयी है, न यह कोई व्यक्ति है, यह अज है, नित्य है, शाश्वत है, शरीर का हनन हो जाता है, लेकिन आत्मा का हनन नहीं होता है)
प्राचीन वेद ऋग्वेद संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति से सबंधित ज्ञान का सागर है। इस वेद में देवताओं को प्रसन्न करने के लिये 11 हजार मंत्र है।

संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति से सबंधित ज्ञान से परिपूर्ण ऋग्वेद में मौजूद देवी देवताओं का आह्रान करने के लिये इसमें वर्णित मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
यर्जुवेद में समाहित है, खगोल विज्ञान का अध्ययन
दूसरा वेद यर्जुवेद है। शुक्ल और कृष्ण दो भागों में विभाजित यर्जुवेद में हिन्दू धर्म से सबंधित विभिन्न संस्कारों के यज्ञों के संबधित 1 हजार से अधिक मंत्र है। इसके शुक्ल यर्जुवेद में सिर्फ मंत्र है जबकि कृष्ण यजुर्वेद में यज्ञ सबंधित अनुष्ठानों की प्रक्रिया का उसके अर्थो का वर्णन के साथ खगोल विज्ञान का अध्ययन भी सम्मलित है।

इसके साथ ही यर्जुवेद के मंत्रों में दण्ड कर्म पारायणम् में एक विशेष विधि से मंत्रों को उच्चारित किया जाता है। इसमें पाठों को सीधे और फिर उल्टा करके पढ़ते है।
वेदांत अवस्था का वेद है, अथर्ववेद
सूर्य देव को समर्पित तीसरे वेद सामवेद में मंत्र संगीत के रुप में वर्णित मंत्र है। इन मंत्रों का उच्चारण प्राचीन आर्यो द्वारा किया जाता था। यह वेद चारों वेदों में सबसे छोटा वेद है इसके मंत्रों को देवताओं की स्तुति में गाया जाता है।

इस वेद में भारतीय संगीत (सा रे गा मा) की उत्तपत्ति का प्रारम्भिक रुप भी देखने को मिलता है। इसके अलावा इस वेद में इंद्र और सोम देवताओं की स्तुति भी है।
वेदों में चौथा वेद अथर्ववेद चिकित्सा और विज्ञान का वेद है। इस वेद में जादू टोना, व्याधि निवारण, वशीकरण, तंत्र मंत्र से सबंधित विधियों और मंत्रों को सम्मलित किया गया।

अर्थववेद को ज्ञान, दर्शन और ब्रह्म की व्याख्या पर जोर दिया गया है इस लिये इसे वेदांत अवस्था का वेद भी कहा जाता है।
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