Crime News: अस्पताल में लोग इलाज कराने के उद्देश्य से जाते है और डॉक्टरों पर भगवान की तरह भरोसा करके इलाज के लिये स्वंय को उनको सौंप देते है। लेकिन कानपुर के किडनी चोरों ने तो हद ही कर दी। अहूजा अस्पताल में झोलाछाप डॉक्टरों ने जिनके पास डॉक्टरी की डिग्री तक नही वे मरीजों का इलाज कर रहे थे और साथ में किडनी चोरी का बड़ा गैंग भी चलाना शुरु कर दिया था। जिसमें गरीब लोगों को बहला फुसला कर उनकी मजबूरी का फायदा उठाते और धोखे से उनकी किडनी को निकाल कर अमीर जरुरतमंदों से लम्बी रकम लेकर बेच देते थे। किडनी चोरों की हिमाकत से हर कोई हैरान रह गया है। लेकिन इन चोरों खुलासा तब हुआ जब बिहार के एक एमबीए का छात्र जिसके पिता न होने के कारण अपनी माँ की जिम्मेदारी और पढ़ाई का बोझ संभालने के लिये जिसको पैसे की जरुरत थी उसको पैसे का लालच देकर इस अस्पताल के विभाग ने उसके साथ घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

लेकिन उसके बाद भी उसको पैसे नहीं दिये गये। और जब युवक की तबियत बिगड़ी तो उसने पुलिस को फोन किया। तब पुलिस हरकत में आयी और जांच पड़ताल शुरु की तो पता चला कि अहूजा अस्पताल का यह पहला काण्ड नही था। इस अस्पताल का पूरा का पूरा विभाग किडनी चोरी के काण्डों में कई वर्षो से लिप्त था। इसके तार मेरठ, दिल्ली जैसे कई शहरों के अलावा विदेशों तक फैले हुये थे। अहूजा अस्पताल के साथ प्रिया अस्पताल, मेडलाइफ अस्पताल भी इस किडनी काण्ड गिरोह में शामिल होकर मोटी रकम कमा रहा था।

और गरीब तबके के लोगों को पैसे का लालच देकर उनकों शिकार बनाने का धंधा चला रहा था। ये अस्पताल गरीब लोगों और छात्र वर्ग से कम कीमत पर किडनी के दाम तय करते थे और जरुरतमंदों से ऊंची लागत लेकर उन्हें किडनी बेचने का काम करते थे। कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने इस मामले में बयान दिया है कि किडनी चोर गिरोह से सबंधित अपराधियों और मुख्य आरोपी शिवम अग्रवाल गिरफ्तार कर लिया गया है। अभी फरार चल रहे और वारदात से संबंधित अन्य अपराधी जल्द ही गिरफ्त में होगें। इस काण्ड को देखते हुये कानपुर के अन्य अस्पतालों में भी जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
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