Mahashivratri 2026: प्रेम से संपूर्ण संसार आपस में एक दूसरे से बंधा हुआ है। लेकिन हर किसी के लिये प्रेम की परिभाषा को समझ पाना बेहद मुश्किल है। क्योंकि इस दुनियां का प्रत्येक प्राणी पशु पक्षी हो या फिर मानव यहाँ तक स्वयं ईश्वर भी प्रेम के बंधन से मुक्त नही रह सके है। बेजुबान प्राणी प्रेम को महसूस कर सकते है लेकिन उसे बता नहीं सकते केवल जता सकते है। प्रकृति में प्रत्येक मनुष्य के लिये प्रेम के अर्थ और मायने अलग- अलग है। लेकिन इन सबसे परे ईश्वर का दिव्य प्रेम जो कि अलौकिक प्रेम की परिभाषा को प्रदर्शित करता है। आत्मीयता से परे प्रेम गहरी भावनात्मकता का प्रतीक है। आकर्षक नहीं सर्म्पण का भाव करुणा स्नेह का सर्वोच्च रुप प्रेम है। लाख खामियों के बवजूद आत्मीय प्रेम से परिपूर्ण व्यक्ति केवल प्रेम का चुनाव करता है।
प्रकृति में प्रेम कई रुपों में है, विधमान
प्रेम कई रुपों में प्रकृति में विधमान है इसमें परिवार के सदस्यों के प्रति मन में उत्पन्न प्रेम को परिवारिक प्रेम की श्रेणी में रखा गया है। मित्रों से किया जाने वाला प्रेम और आत्मीयता से परिपूर्ण प्रियतम से किया जाने वाला प्रेम ऐसा ही अनुठा प्रेम हिन्दू धर्म में श्रीराधा कृष्ण जी और भगवान शिव पार्वती का प्रेम देखने को मिलता है। माता पार्वती अपने पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थी और भगवान शिव से अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह किया था।
Mahashivratri
मान्यता है कि राजा दक्ष अपनी इकलौती पुत्री सती का विवाह इन्द्रदेव जैसे किसी राजा से करवाना चाहते थे लेकिन राजा दक्ष को माता सती की जिद्द के आगे झुकना पड़ा और सती का विवाह भगवान शिव से करना पड़ा। लेखी को कुछ और ही मंजूर था। जब एक दिन राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया तो सभी देवताओं को न्योता दिया। लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नही किया। लेकिन देवी सती भगवान शिव के मना करने के बावजूद बिन बुलाये अपने पिता के यज्ञ में पहुँच गई। उन्होंने जब वहाँ जाकर देखा पिता दक्ष ने सभी देवताओं को आमंत्रित किया और सबको आदर सम्मान के साथ स्थान दिया है लेकिन भगवान शिव के लिये कोई स्थान नही रखा तब क्रोधित होकर यज्ञ के हवनकुंड में माता सती ने अपने प्राण त्याग दिये।
भगवान शिव को यह आभास हुआ की माता सती ने हवन कुडं की अग्नि में अपने प्राण दे दिये है तब भगवान शिव के क्रोध से संपूर्ण सृष्टि कांप उठी भगवान शिव ने राजा दक्ष का विनाश करने के लिये अपनी जटाओं से भगवान रुद्र को प्रकट किया और माता सती का मृत शरीर अपने हाथों में लेकर घूमते रहे। जब भगवान शिव के इस क्रोध से सृष्टि अंधकार में डूबने लगी तब श्री हरि विष्णुजी ने माता सती के मृत शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से टुकड़ों में विभाजित कर दिया था।
भगवान शिव पार्वती का प्रेम सृष्टि का पहला प्रेम
पौराणिक कथाओं के अनुसार जहाँ-जहाँ पर माता सती के मृत शरीर के टुकड़े गिरे वहाँ पर 51 शक्तिपीठो की स्थापना हुई। जिसमें से हिंगलाज, सुगंधा, अर्पणा, भावनी, जेसोरेश्वरी, महालक्ष्मी, कामाख्या, ज्वाला जी, अंबाजी और नैना देवी आठ प्रमुख शक्तिपीठ है। जिसके बाद माता सती ने पर्वतराज हिमालय और देवी मैना की पुत्री बनकर पार्वती रुप में जन्म लिया और वर्षो की तपस्या के बाद भगवान शिव से विवाह किया। भगवान शिव और माता सती के इस जन्म जन्मातंर के पवित्र बधंन को सृष्टि का पहला प्रेम और प्रेम विवाह माना गया।
जे.के. मंदिर में महाशिवरात्री पर रुद्राभिषेक और शिवभक्ति पर कार्यक्रम
भगवान शिव पार्वती के विवाह के इस पावन दिन को संपूर्ण हिन्दूधर्म महाशिवरात्री के त्योहार के रुप में धूमधाम से मनाता है। इस वर्ष भी महाशिवरात्री का त्योहार दिनांक 15 फरवरी दिन रविवार को मनाया गया। गंगा किनारे बसे शहर कानपुर में भी जगह-जगह भोलेनाथ के मदिरों में जयकारा लगाये गये और विधि विधान से भगवान शिव पार्वती के विवाह की रस्में आदा की गई।
J.K. Temple Kamla Nagar, Kanpur…
भगवान भोलेनाथ का गंगा किनारे बसा मंदिर परमट, सिद्धनाथ, नागेश्वर मंदिरों के अलावा शहर के अन्य शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतारे लगना शुरु हो गई। और देर रात तक इस पावन दिन के अवसर पर भगवान शिव के दर्शन के लिये भीड़ ललायित रही। शहर के प्रसिद्ध श्रीराधा कृष्ण जे.के. मंदिर कमला नगर में प्रातः काल भगवान शिव के रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। जबकि सायंकाल के समय रिदम ग्रुप ऑफ कथक के कलाकारों द्वारा भगवान शिव के भजनों और ताडंव पर सुन्दर कथक नृत्य प्रस्तुत किये गये। जिसको देख कर मंदिर प्रांगण में मौजूद भक्तगण शिव महिमा में डूबे नजर आये।
-समाप्त ……….
(यह लेख किसी की धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से नही लिखा गया है)
पिछले 15 वर्षो से मैं पत्रकारिता सम्बंधित क्षेत्रों से जुड़ी हूँ। समाचार लेखन, विज्ञापन स्क्रिप्ट लेखन, वेबसाइट पर आध्यात्मिक लेख लिखने के साथ पत्रकारिता के शिक्षक के रुप में कार्य किया है। मैने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से एम.जे.एम.सी, एम.एस.सी, बी.एड, एल.एल.बी, (रेगुलर) और अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र एवं हिन्दी विषय में परस्नातक की (व्यक्तिगत) परीक्षा पास कर डिग्री धारित की है। मैं अपनी वेबसाइट (Anantpratigya खबर) में पाठक वर्ग को सत्य और स्पष्ट जानकारी से सबंधित खबरें देने हेतु प्रयासरत् रहूँगीं।