Chaitra Navratri 2026: नवरात्री के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। शत्रु संहारक और अपने भक्तों की रक्षक देवी चंद्रघंटा है। जब महिषासुर दानव का अत्याचार तीनों लोको में चरम पर व्याप्त था और वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुये देवी देवताओं को परेशान करके समस्त लोकों में अपना अधिपत्य स्थापित करने लगा था। जिससे त्रस्त होकर सभी देवी देवता अपनी रक्षा के लिये भगवान शिव की शरण में पहुँचें और उनसे महिषासुर के वध के लिये प्रार्थना की तभी भगवान शिव ने देवी चंद्रघंटा को अवतरित किया और सभी देवी देवताओं ने अपनी शक्तियों से देवी चंद्रघंटा को सुशोभित कर दिया।

अपने सिर पर अर्द्धचंद्र और सुनहरे नारंगी, पीले वस्त्र धारण किये देवी चंद्रघंटा अत्यन्त सरल और सौम्य रुप में विराजित है। देवी अपने दस हाथों में नकरात्मक शक्तियों का नाशक शंख, शत्रु के विनाशक शस्त्र चक्र, गदा, त्रिशुल, धनुषबाण, धारित किये है। शेर पर सवार होकर देवी चंद्रघंटा हमेशा दानव असुरों का अतं करने एंव युद्ध के लिये तत्पर रहती है। माता दुर्गा के तीसरे रुप में विराजित देवी घंटा को पीले और लाल फूल चढ़ाने, दूध से बनी खीर, सफेद मिठाई का भोग लगाकर विधिविधान से पूजा अर्चना करने से देवी अत्यंत प्रसन्न होती है और भक्तों को सुख समृद्धि, साहस, वीरता का आशीर्वाद प्रदान करती है।
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