Kanpur News: ‘शिवोहम’ दो शब्द से मिलकर बना है। शिव एंव अहम् जिसका अर्थ है ‘मैं ही शिव हूँ’ इसमें भक्त केवल शारीरिक और मानसिक रुप से भगवान शिव को समर्पित नहीं होता है बल्कि इसमें आत्मा का जुड़ाव भी शिव से हो जाता है। तब शिव व्यक्ति के अतंरात्मा में विराजित होकर चेतना में समाहित हो जाते है। ऐसी आत्मचेतना को जाग्रत करने वाले बमबमम बम लहरी… कैलाश खेर की आवज के आध्यात्मिक जागरण से सीएसजेएयू का कोना-कोना गूंज उठा।

दिनांक 28 फरवरी दिन शनिवार को अमर उजाला और तिरंगा अगरबत्ती की ओर से सीएसजेएमयू में आस्था से आत्मा को जोड़ने वाली आध्यात्मिक संध्या का आयोजन किया गया। जिसकी गूंज केवल लोगों के मन तक नहीं पहुँची बल्कि आत्मा को छू कर ईश्वर को भक्त की आस्था को परिचित करा दिया। अर्थात मैं ही शिव हूँ भाव को उत्पन्न करती ध्वनि शिवोहम से व्यक्ति का स्वरुप शिव की तरह शुद्ध और शान्त होते हुये परमात्मा यानि शिव में विलीन होने लगता है। ऐसे ही सीएसजेएमयू में आयोजित कैलाश खेर और उनके कैलासा बैंड की भव्यमय प्रस्तुति शिवोहम ने होली के पावन पर्व के अवसर पर समस्त विश्वविद्यालय को शिव भक्ति के रंगों में रंग दिया।
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