Chetra Navratri 2026: दिनांक 19 मार्च दिन गुरुवार से 27 मार्च दिन शुक्रवार को समाप्त होने वाली चैत्र नवरात्री को अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है। इसी दिन से हिन्दू नववर्ष के प्रारम्भ के साथ एक युग का अंत और नयी ऊर्जा के साथ नये दिन की शुरुआत होती है। मान्यता है कि चैत्र नवरात्री में मातारानी नौ रुपों में पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्मी प्रथम रुप शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा तीसरा, चौथा कूष्मांडा, पाचवां स्कंदमाता, छठा कात्यायनी, सातवां कालरात्री, आठवां महागौरी और नौवे रुप सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन के समस्त कष्टों के निवारण के साथ सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

नवरात्री के प्रथम दिन कलश स्थापना की जाती है इस दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता शैलपुत्री बैल पर सवार होकर आती है। इन्होंनें दाहिने हाथ में त्रिशुल और बायें हाथ कमल को धारण किया हुआ है। माता शैल पुत्री का सौम्य रुप भक्तों को रोग दोष से मुक्ति देने वाला है। माना जाता नवरात्री के प्रथम दिन भगवान शिव की पत्नी माता शैलपुत्री को सफेद मिठाई और देशी घी का भोग लगाने और पीले लाल फूल चढ़ा कर पूजा अर्चना करने से स्वास्थ्य समृद्धि की परिपूर्णता जीवन में बनी रहती है।
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