US, Israel Vs Iran War: अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरु होने वाले युद्ध को आज 34 दिन हो चुके है। लेकिन युद्ध का अभी तक कोई हल नही निकल सका है। अमेरिकी सरकार ट्रंप की स्थिति इस समय ऐसी बन गई है। ईरान फांस बन कर उनके गले में अटक गया न वह उसे निगल पा रहे और न ही उगल पा रहे है। इससे साफ हो गया कि ट्रंप को तेल भी नही मिला और न ही सत्ता मिल सकी है और हलात इतने बिगड़ चुके है कि युद्ध से पीछे हटने की नौबत आ गई।
अमेरिकी सरकार ट्रंप के युद्ध से पीछे हटने के है, संकेत
क्योंकि अमेरिकी जनता ट्रंप के खिलाफ होती नजर आ रही है और जिन देशों से ट्रंप को उम्मीद थी वह भी उनका साथ देने से कतराने लगे है। ऐसी स्थिति में उनके पास केवल एक ही रास्ता बच रहा है कि किसी भी तरह युद्ध से पीछे हट जाना। प्राप्त जानकारी से यह बात निकल कर सामने आ रही है कि अमेरिकी सरकार ट्रंप ईरान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के प्रयास में है। जबकि ईरान युद्ध के लिये अभी भी डटा पड़ा है।

अमेरिका इजराइल हो या फिर ईरान इन सभी देशों की लाखों की संख्या में आम जनता के जान माल के नुकसान के बाद अमेरिकी सरकार ट्रंप का युद्ध से पीछे हटने का संकेत पूरे विश्व को हैरान किये हुये है। की आखिरकर इजराइल और ईरान के युद्ध में अमेरिका कूदा क्यों था और अब युद्ध से पीछे हटने का संकेत क्यों दे रहा है।
यूरोपीय देशों ने ट्रंप को सैन्य शक्ति देने से किया इंनकार
वजह साफ तौर पर नजर आ रही है। कि इस युद्ध में अमेरिका ने जिन देशों से साथ की उम्मीद रखी थी वे सभी देश एक-एक करके अमेरिकी सरकार ट्रंप का साथ छोड़ते जा रहे है। इटली, तुर्की, स्पेन, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देश युद्ध की शुरुआत में अमेरिका का समर्थन किया। लेकिन अब स्थिति को अत्यधिक बिगड़ते देख कर साथ देने से कतराने लगे है। इसमें यूरोपीय देश फ्रांस, जर्मनी, इटली, ने सैन्य शक्ति को देने से इंकार कर दिया है। सैन्य गतिविधियों के लिये हवाई और जमीनी सुविधाओं की कमी, यूरेनियम का गहराता संकट और तेल न मिलने से ऊर्जा सकंटों से जूझती अमेरिकी सरकार शायद अब युद्ध से पीछे हटना ही बेहतर समझ रही है।
…..समाप्त……….

