SHIV RUDRA ROOP: रुद्र का मतलब भयानक शक्तिशाली होता है भगवान शिव के उनके विनाशकारी रुप को प्रर्दशित करने वाला रुद्र रुप है। शिवजी का शक्तिशाली रुप उनकी शक्तियों का परिचायक है यह दर्शता है कि शिव विनाशक के साथ पुनर्जन्म के प्रतीक है। महर्षि कश्यप और सुरभि के पुत्र माने जाने वाले भागवान शिव के रुद्र रुप के 11 अवतार है। माना जाता है यह सभी रुप देवताओं के कार्यो को सिद्धि करने के लिये और सृष्टि कल्याण के लिये उत्पन्न हुये थे।
उपनिषद में शिव के 11 रुद्र रुपों को बताया गया है, 10 इंद्रियाँ औऱ एक मनः
उपनिषद में इन सभी रुपों को दस इंद्रियां और एक मन एकादश प्राण माना गया है। रुद्र रुप के स्मरण करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है। कपाली रुद्र रुप जीवन मृत्यु का प्रतीक माना जाता है।ऊर्जा प्राण शक्ति को दिखाता नाड़ी को प्रर्दशित करता रुप पिंगल,शक्ति पराक्रम का स्वामी भीम है। जबकि शिव का विरुपाक्ष रुद्र अवतार भौतिक और आध्यात्मिक संसार को देखने में सक्षम है।

अग्नि तत्व और नवीनता को दिखाता विलोहित रुप योद्धा न्याय का रक्षक बना शास्त रुप पालनहार एंव संरक्षक का अजपाद अवतार प्राकृतिक आपदाओं में संकट से मुक्ति दिलाने के लिये आदिर्बुध्य रुप धारण किये शिव जब शांत और दयालु हुये तो शंभु कहलाये। बुरी शक्तियों के विनाशक शिव चण्ड बनें।
शिवजी के 11वें रुद्र अवतार है, हनुमानजीः
ब्राह्मांडीय ऊर्जा को अपने में समाहित कर भव रुद्र रुप में अवतरित होने वाले शिव के 11 वें रुद्र रुप भगवान श्रीराम के भक्त अत्यंत बलशाली हनुमान जी है। शिवजी के हनुमान अवतार ने प्रभु श्रीराम और सीता माता को ह्द्य में बसाया। महाभारत में अर्जुन के रथ पर लगे ध्वज पर विराजित होकर अर्जुन के सारथी बने जगतविधाता श्रीकृष्ण को कुरुक्षेत्र मैदान में जीताया। स्वंय प्रकट होने वाले स्यंभु अनेकों रुप धारण करने वाले भगवान शिव आदि अनन्त देवों के देव महादेव संहारक रुप में रुद्र है।

नये साल के मौके पर कानपुर शहर में परमट द्वारकाधीश और जे.के. मंदिर में विराजमान संहारक और जगत विधाता श्रीकृष्ण के भक्ति में चूर भक्तगण दर्शन पाने के लिये ललायित हो उठे। जहाँ परमट मंदिर में नये वर्ष की पहली सुबह के अवसर पर प्रातः 3 बजे से मंदिर के पट खुलने के बाद से ही भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी।
जे.के. मंदिर में रुद्र यज्ञ एंव भावार्पण कार्यक्रम का आयोजनः
वहीं नव वर्ष के अवसर पर कानपुर कमला नगर स्थित जे.के. मंदिर का नाजारा भी देखने लायक था। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी नव वर्ष के पावन अवसर पर रुद्रयज्ञ का आयोजन किया गया । जिसमें प्रातः 11 बजे से सायं 4 बजे तक 11 आचार्यो द्वारा 5100 आहूतियां दी गयी। इसमें भारी संख्या में आये भक्तगणों ने भी अग्निकुण्ड में अहुति देकर वातावरण को शुद्ध करने के साथ अपनी अंतरात्मा को भी पवित्र करके नये वर्ष का स्वागत किया।

सांयकाल के समय रिदम ग्रुप द्वारा मंदिर प्रागंण में भावार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें कलाकारों ने श्रीराधा कृष्ण की भावभंगिमाओं पर आधारित भजनों एंव भक्तिमय गीतों पर नृत्य प्रस्तुति से मंदिर आये भक्तगणों को राधा कृष्ण की भक्ति में लीन कर दिया।

