Maagh Maah: 21 जनवरी दिन बुधवार से शुरु 19 फरवरी दिन गुरुवार को समाप्त होने वाले माघ महीने में सूर्यदेव के उत्तरायण होने के कारण इस समय को देवताओं का समय माना जाता है। इस माह में चंद्र और सूर्यदेव आमने सामने होने के कारण कुंडलियों में मौजूद सूर्य चंद्र से संबंधित दोष दूर हो जाते है। इस पवित्र माह में गंगा स्नान से समस्त पापों से मुक्ति मिलने के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैदिक ग्रंथों में सूर्य को जगत की आत्मा और नौ ग्रहों का राजा कहा गया है।

सभी ग्रहों का अस्तित्व अपने भीतर समाहित करने वाले सूर्यदेव भगवान विष्णु के अंश माने जाते है। माघ माह में जन्में सूर्यदेव महर्षि कश्यप देवी अदिति के गर्भ से उत्पन्न हुये इसलिये इन्हें आदित्य के नाम से भी पुकारते है। इस पावन माह में सात घोड़ो के रथ पर सवार औषधीय गुणों से परिपूर्ण सूर्यदेव की विधिविधान से पूजा करने से आयु बल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन की सभंव ही नही प्रत्यक्ष रुप में दर्शन देने वाले सूर्यदेव को पिता का कारक कहे जाने वाले सूर्यदेव को तांबे के पात्र से अर्ध्य देने से पितृ दोष भी दूर होते है।
-समाप्त….
(पाठक इस लेख में लिखित तथ्यों को अपने विवेक के अनुसार ग्रहण करें)

