
तुलसी के पौधे को हिन्दू धर्म में अत्यन्त पवित्र पौधा माना जाता है। 2014 से प्रत्येक वर्ष 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है। औषधीय गुणों से परिपूर्ण तुलसी का पौधा मानव जीवन के लिये जीवनदायनी जड़ीबूटी की तरह कार्य करता है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार यह पौधे की पत्तियों के सेवन से शरीर को विभिन् रोगों से मुक्ति मिलती है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करके यादाश्त को सक्रिय करने और एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके औषधीय गुण शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करके मधुमेह रोग से मुक्ति प्रदान करता है। तुलसी की पत्तियों को चाय में मिला कर पीने से सर्दी खांसी जुकाम में आराम मिलता है। अदरक और शहद के साथ तुलसी की पत्तियों को पीस कर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती और तुलसी की पत्तियों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा सबंधी रोगों की समस्या से निजात मिलता है।
हिन्दू पंचाग की ग्यारहवीं तिथि को कहा जाता है,एकादशी:
हिन्दू धर्म में तुलसी जी को शालीग्राम भगवान की पत्नी रुप में पूजा जाता है। जो कि भगवान विष्णु का ही रुप है। तुलसी पूजन में एकादशी को विशेष महत्व दिया गया है। हिन्दू पंचाग की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है। यह तिथि माह में दो बार आती है। भगवान विष्णु को समर्पित पूर्णिमा पक्ष के बाद आने वाली तिथि को कृष्ण पक्ष एकादशी और अमावस्या के बाद वाली तिथि को शुक्ल पक्ष एकादशी कहा जाता है। एकादशी के व्रत की शुरुआत मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अश्वमेघ यज्ञ के समान फल देने वाली उत्पन्ना एकादशी से किया जाता है। सफला एकादशी सभी मनोकामना पूर्ण करती है। यश और वैभव प्राप्ति के लिये ष़ट्तिला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस दिन तिल का दान करने से कभी धन की कमी नही होती है। पापों का नाश करने के लिये जया एकादशी का व्रत सर्वोत्तम माना जाता है। विजया एकादशी आपके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजयी बनाने में विशेष महत्व रखती है। वरुथिनी एकादशी का व्रत सुख समृद्धि से जीवन को भर देता है। मोहमाया से मुक्ति के लिये मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है।
मनोकामना पूर्ण करने के लिये कामिका एकादशी का व्रत:
तपस्या के लिये निर्जला एकादशी, समस्त पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिये योगिनी एकादशी, भगवान विष्णु के शयन के दिन देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। मनोकामना पूर्ण करने के लिये कामिका एकादशी का व्रत विशेष फलदायी सिद्ध होता है। वंश वृद्धि के लिये पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख प्राप्ति के उद्देश्य से किया जाता है। जबकि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी के दिन आवंले के पेड़ की पूजा की जाती है। चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी को वर्ष की प्रथम एकादशी मानी जाती है। वर्ष में कुल 24 एकादशी होती है अधिक मास होने पर एकादशी की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो सकती है। प्रत्येक एकादशी का विशेष महत्व है, माना जाता है कि एकादशी के दिन तुलसी जी भगवान विष्णु के लिये व्रत रखती है इसलिये एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल देना वर्जित माना जाता है।
