YAGYA: पाँच महायज्ञों को हिन्दू धर्म में गृहस्थों के दैनिक कर्तव्यों के रुप में शामिल किया गया है। इसमें वेदों का अध्यापन और ईश्वर के ध्यान को ऋषियज्ञ, जन्म, शादी एंव गृह प्रवेश के अलावा अन्य शुभ अवसरों पर देवी देवताओं को आवाह्न हेतु हवनकुंड की अग्नि में मंत्रोच्चारण के साथ दी जाने वाली देवताओं को आहुति को देवयज्ञ कहा जाता है। अग्नि, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी समेत सभी प्राणियों को भोजन अर्पित करने के लिये वैश्वदेव यज्ञ किया जाता है। जबकि अतिथियों का सत्कार, साधु संतों सन्यासियों की सेवा करने को अतिथि यज्ञ कहते है।
सबसे सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है, अश्वमेध यज्ञः
खास अवसरों पर किये जाने वाले अन्य प्रमुख यज्ञ भी है। इन यज्ञों की श्रेणी में अश्वमेध, राजसूय और वाजपेय यज्ञों का वर्णन वेदों में मिलता है। इनमें सबसे सर्वश्रेष्ठ यज्ञ अश्वमेध यज्ञ है। प्राचीनकाल के शासक अपनी संप्रभुता को सिद्ध करने के उद्देश्य से अश्वमेध यज्ञ करवाते थे। सवाई राजा जय सिंह द्वितीय अश्वमेध यज्ञ करवाने वाले अंतिम शासक थे। स्मार्त यज्ञ को गृहस्थों द्वारा किया जाता है।

तामसिक, सात्विक और राजसिक है, त्रिगुणी यज्ञः
जगत विधाता श्रीकृष्ण की श्रीमद्भगवद् गीता से तामसिक, सात्विक और राजसिक त्रिगुणी यज्ञों के विधानों की जानकारी मिलती है। हिन्दू धर्म में विभिन्न अवसरों पर हवन और यज्ञ करवाने की परम्परा वैदिक काल से चली आ रही है। हवन यज्ञ का छोटा रुप है। हवन त्योहारों एंव महत्वपूर्ण अवसरों पर देवी देवताओं को आवाह्न करने के उद्देश्य से 11 या 121 पाठ करके अग्नि में हवन सामग्री की आहुति देकर वातावरण में शुद्धता सकरात्मकता और पवित्रता लाने के लिये किया जाता है।
नव वर्ष के अवसर पर जे.के. मंदिर में रुद्र यज्ञः
यज्ञ विशेष उद्देश्य की पूर्ति एंव संकट टालने और सिद्धि प्राप्त करने हेतु किया जाता है। इसमें देवताओं के आवाह्न के लिये 121 पुरोहित 11-11 बार पाठ करके वेद मंत्रोच्चारण के साथ अग्नि में आहूति डालते है। इसे महारुद्र यज्ञ कहा जाता है। अग्नि आग के देवता है दक्ष प्रजापति की पुत्री स्वाहा अग्निदेव की पत्नी है। अग्निदेव देवताओं के लिये यज्ञ सामग्री के भरण करते है जबकि अग्निदेव की पत्नी स्वाहा आहूतियों को देवताओं तक पहुँचाती है। कानपुर शहर में श्रीराधा कृष्ण के मनभावन दर्शन हेतु भक्तों के लिये 1960 में खोला गया कमला नगर स्थित जे.के. मंदिर में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी नव वर्ष के पावन अवसर पर दिनांक 01-जनवरी दिन गुरुवार को रुद्रयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रातः 11 बजे से सायं 4 बजे तक 11 आचार्यो द्वारा 5100 आहूति दी जायेगी। जिसमें समस्त भक्तगण जगत विधाता श्रीकृष्ण एंव संहारक आदि अनन्त देवों के देव महादेव का आशीष प्राप्त कर सकेगें।

