Ganesh Chaturthi 2026:हिंदू धर्म में गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजे जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। शुभ कार्यों और अनुष्ठानों में गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता के रूप में पूजा जाना सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।
इस अवसर पर लोग अपने घरों में गाजे-बाजे के साथ गणपति की स्थापना करके 10 दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं, फिर 11वें दिन विसर्जन किया जाता है। गणेश जी के 12 प्रमुख नाम रिद्धि-सिद्धि के देवता भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र को 108 नामों से पुकारा जाता है।
गणपति बाधाओं को हरकर बने विघ्ननाशक
जिनमें सुंदर मुख वाले गजानन, एक दांत वाले एकदंत, लाल-भूरे रंग वाले कपिल, हाथी जैसे कान वाले गजकर्णक, लंबा पेट रखने वाले लंबोदर, विशालकाय विकट, बाधाओं को हरने वाले विघ्ननाशक, न्यायकर्ता विनायक, धुएं की आभा वाले धूम्रकेतु, शिव गणों के स्वामी गणाध्यक्ष, मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले भालचंद्र और हाथी के मुख वाले गजानन के 12 नाम लोग प्रमुखता के साथ लेते है।

1893 में सार्वजनिक रुप से मनाया गया गणेश उत्सव
इस ऐतिहासिक उत्सव की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में हुई थी, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से मनाने का श्रेय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को जाता है। 1893 में जब अंग्रेजों ने सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी लगा दी थी, तब तिलक ने लोगों को एक जगह एकत्रित कर स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए इस त्योहार को सार्वजनिक रूप से मनाना शुरू किया था।
पार्वती जी ने अपने उबटन से निर्मित किये थे गणेश जी
पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने अपने उबटन से गणेश जी का निर्माण कर उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया था। जब गणेश जी ने भगवान शिव को पार्वती जी से मिलने जाने से रोका तो क्रोध में शिव जी ने उनका मस्तक धड़ से अलग कर दिया, बाद में हाथी का मस्तक लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया गया।
मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर सच्चे मन से पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। लोग भजन-आरती के साथ मोदक का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व एकता और भाईचारे का प्रतीक है।
(नोटः इस लेख में लिखित सभी तथ्य श्रद्धालु अपने मनोभावों के अनुरुप ग्रहण करें)
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