Akshaya Tritiya 2026:वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया जिसे आखा तीज भी कहते है इस वर्ष हिंदू धर्म में 19 और 20 अप्रैल को संपूर्ण भारत वर्ष में धूमधाम से मनायी जा रही है। मान्यता है स्वयं सिद्ध मुहूर्त में मनाये जाने वाले इस पावन पर्व के दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर श्री ऋषभदेव देव ने अपनी एक वर्ष की तपस्या पूर्ण की थी और इसी तिथि को श्रीहरि के छठे अवतार भगवान परशुराम भी अवतरित हुये थे।

अक्षय तृतीया में किये पुण्यों का असर रहता है, जन्मजन्मातंर
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन किये गये पुण्यों का असर जन्मजन्मातंर तक बना रहता है। अक्षय का अर्थ होता है कभी न समाप्त होनें वाला इस दिन सोना खरीदने का एक मुख्य कारण यही है क्योंकि सोना कभी नष्ट नही होता लम्बे समय तक अपना मूल्य बनाये रखने में सक्षम सोना अपनी कीमत को दिनों दिन बढ़ाता है। अक्षय तृतीया में माता लक्ष्मी के साथ श्रीहरि के पूजन की प्रथा सदियों से चली आ रही है। भक्तगण इस दिन पीले वस्त्रों को धारण करके पीले फूल, पीली मिठाई, रोली, हल्दी, चावल आदि से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुये विधि विधान से पूजा अर्चना करते है तो उन्हें मनचाहे फलों की प्राप्ति होती है।

अक्षय तृतीया पर खरीदें, अक्षय वस्तुयें
अक्षय तृतीया में सोने चाँदी की खरीदारी बेहद शुभ मानी जाती है। ज्योतिषशास्त्रों के अनुसार इस दिन धर्म एंव शिक्षा से सबंधित पुस्तकें, पीले वस्त्र, तुलसी का पौधा आदि खरीदना भी शुभ होता है। सूखा धनिया और सेंधा नमक घर में लाने से नकरात्मकता से मुक्ति मिलती है औऱ पूरे वर्ष घर में धन धान्य सुख समृद्धि का आगमन होता रहता है। जबकि इस दिन लोहे, सीसे, प्लास्टिक और चाकू, कैची, हथियार और सजावटी वस्तुओं की खरीददारी से परहेज करना चाहिये। क्योंकि मान्यता है कि आज के दिन खरीदी जाने वाली सभी वस्तुयें कभी न क्षय होने वाली होती है। इसलिये अक्षय वस्तुओं की खरीददारी करना ही लाभकारी होता है।
...समाप्त……
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