Supreme Court : अनुच्छेद 124 के अतंर्गत भारत के संविधान के साथ ही 1950 में सर्वोच्च न्यायालय का गठन किया गया था। ताकि देश में संविधान में लिखित कानूनों का सख्ती से पालन किया जा सके। और सर्वोच्च न्यायालय को अंतिम अपीलीय न्यायालय का दर्जा दिया गया। भारत के मूल संविधान में सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश समेत कुल 8 न्यायाधीशों की व्यवस्था की गयी थी। लेकिन संसद द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति में संशोधन का प्रावधान भी किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश 33 से हुये 37
भारत के राष्ट्रपति और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों के समूहों की सलाह पर कोलेजियम पद्धति से उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की यह नियुक्तियां की जा सकती है। अभी तक मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त समेत कुल 34 न्यायाधीश थे। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सर्वोच्च न्यायालय संशोधन अध्यादेश 2026 के लागू होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय 1956 में संशोधन उपरांत कोलेजियम पद्धति से न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 और एक मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त समेत 38 हो गयी है।
इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना, संजीव सचदेवा, श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति शील नागू और अरुण पल्ली सर्वोच्च न्यायालय के नये न्यायाधीश नियुक्त हुये जिनसे अब सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति और भी शक्तिशाली हो जायेगी।
क्या है? कोलेजियम पद्धति
कोलेजियम पद्धति से भारत के सर्वोच्च और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण किया जाता है। इस पद्धति में सर्वोच्च न्यायालय के एक मुख्य न्यायाधीश और चार अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश फैसला लेते है। कोलेजियम द्वारा जिन नामों की सिफारिश की जाती है। केन्द्र सरकार उन्हीं नामों को मंजूरी प्रदान करती है।
समाप्त…….
ये भी पढ़ेः दिल्ली मालवीय नगर में आग से धधक उठा रेस्त्रा

