Sawan 2026: सृष्टि के संहारक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय सावन मास में शिव के भक्तगण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिये उनकी विधि विधान से पूजा अर्चना करते है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मान्यता है कि जब भगवान शिव ने समुद्र मथन में निकला विष ग्रहण किया था तब उनका शरीर गर्मी से तप रहा था तब समस्त देवी देवताओं ने उनके शरीर की तपन को शान्त करने के लिये भगवान शिव को जल से अभिषेक कराया था। जिसके बाद उनके द्वारा ग्रहण किये गये हलाहल विष की तपन शांत हुयी थी। माना जाता है कि सर्वप्रथम रावण और भगवान परशुराम ने शिवलिंग का कांवड़ के जल से अभिषेक किया था। तभी से श्रद्धालु द्वारा भगवान शिव के शिवलिंग को कांवड़ के जल से अभिषेक कराने की प्रथा चली आ रही है।

शिवभक्त सावन मास में भगवान शिव को दूर दराज से गंगाजल को कांवड़ में भर कर लाते है और भोलेनाथ का अभिषेक करते है। भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की श्रद्धा को देखते हुये। पवित्र माह सावन में भगवान शिव के तीर्थ स्थलों के रेलवे स्टेशनों और कांवड़ ले जाने वाले रास्तों पर नॉन-वेज बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त अन्य पड़ोसी राज्यों में भी स्थानीय प्रशासन व संगठनों की मांग पर कांवड़ यात्रियों के रूट वाले ढाबे और दुकानों पर मांसाहारी भोजन की बिक्री पर रोक तथा नेमप्लेट लगाने के लिये कहा गया है।
सावन में वाराणसी समेत कई रेलवे स्टेशन नॉन-वेज फ्री घोषित
वाराणसी के प्रशासन ने पूरे शहर समेत प्रमुख कांवड़ मार्गों तथा श्री काशी विश्वनाथ क्षेत्र के पास मांस-मछली की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन परिसर को सावन में नॉनवेज फ्री घोषित कर दिया गया है। कांवड़ यात्रा के दौरान जिलों में तैनात जिलाधिकारियों नें नॉनवेज की सभी दुकानें बंद रखने और होटल, ढाबा और ठेलों को साफ तौर पर निर्देशित कर दिया हैं कि सावन माह के दौरान मीट, चिकन, अंडा जैसी चीजें न बेची जाएं। और उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ ने निर्देश जारी करते हुये कहा है कि सावन में कांवड़ मार्ग पर शुद्ध शाकाहार ही मिलेगा। शिवभक्त कांवड़ लेकर लम्बी दूरी की यात्रा तय करके आते है ऐसे में उनके लिये रास्ते में शुद्ध शाकाहारी भोजन कि व्यवस्था बेहद जरुरी है। कई नॉन-वेज विक्रेताओ ने प्रशासन के इस फैसले का समर्थन भी किया है।
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