Teacher’s Day 2026: पूर्व राष्ट्रपति एंव शिक्षाविद् भारत रत्न से सम्मानित डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती और शिक्षक दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। शिक्षक दिवस गुरु के सम्मान का दिन है, प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को पूरे देश में मनाया जाने वाला यह दिन मात्र एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, जिन्होंने हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का कार्य किया।
महान दार्शनिक, विद्वान थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
कहा जाता है कि 1888 में जन्में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, विद्वान और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से जब कुछ विद्यार्थियों ने उनके जन्मदिन मनाने की इच्छा को व्यक्त की। तब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिन को शिक्षकों के सम्मान में शिक्षक दिवस के रुप में मनाने के लिए कहा। तभी से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वरः भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर की श्रेणी में रखा गया है। कहा जाता है कि गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः। गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही शिव है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। एक शिक्षक सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देता बल्कि वह जीवन जीने की कला के साथ हमारे भीतर अच्छे संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और सही-गलत में अंतर से भी अवगत कराकर विद्यार्थी के भीतर व्याप्त प्रतिभा को निखारने के लिए हमेशा प्रयासरत् रहता है।
संस्कार अनुभव का केंद्र है शिक्षक
आज हमारे देश में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी , वकील हो या नेता सभी की सफलता के पीछे किसी न किसी गुरु का आशीर्वाद जरूर होता है। आज का दौर इंटरनेट और AI ने भले ही ले लिया है। लेकिन उस जानकारी को ज्ञान में बदलने का कार्य आज भी केवल एक शिक्षक ही कर सकता है। गूगल आपको सूचना दे सकता है, लेकिन संस्कार और अनुभव एक शिक्षक से ही प्राप्त हो सकते है। आज के समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। उन्हें छात्रों को न केवल पढ़ाना है, बल्कि उन्हें मोबाइल और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल की जानकारियों से भी अवगत कराना है।
शिक्षण संस्थानों में हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
5 सितंबर दिन शनिवार को पूरे देश में शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ । जिसमें विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों को उपहार भेंट करने के अलावा उनके लिए कविताएं, भाषण और विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया।

लेकिन आज की Gen-Z के लिए शिक्षकों का सम्मान तब ही सफलतम रुप ले सकता है जब वह अपने गुरुओं की दी गई शिक्षा को अपने जीवन में अपनायें। इसलिए विद्यार्थी अपने जीवन में किसी भी मुकाम पर क्यों न स्थापित हो जाए तब भी अपने शिक्षकों का हमेशा आदर करना विद्यार्थी का सर्वश्रेष्ठ कर्तव्य है। जीवन में इन्हीं संस्कारों को अपनाते हुए आज के विद्यार्थी जीवन में प्रगति की ओर अग्रसरित हो सकते है।
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