Kanpur: जे.के. मंदिर केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की पहचान है। जे.के. संस्थान के प्रबंधक आशीष सिंह चौहान जी के नेतृत्व में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दिन पूरा मंदिर रोशनी से जगमगा उठा, यहां शहर की सबसे बड़ी भव्य झांकी सजाई गई। इस पावन अवसर पर झांकी को फूलों और लाइटों से भव्य रूप दिया गया था।
रंग बिरंगी रोशनी से सजे ऊँचे-ऊँचे झूले श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर धरती पर स्वर्ग जैसी छवि को प्रतीकात्मक रुप में शोभित हो रहे थे। यहां की सफेद मार्बल की सुंदर नक्काशी रात की चांदनी में कलरफुल लाइटिंग के साथ बेहद खूबसूरत प्रतीत हो रही थी। मंदिर में जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर गीता उपदेश तक की झलक दिखाई दी।
“नंद घर आनंद भयो” जय कन्हैया लाल की
रात्रि 12 बजे श्री कृष्ण का जन्म होते है, शंख, घंटा और “नंद घर आनंद भयो” के जयकारों से पूरा मंदिर गूंजने लगा। मंदिर प्रशासन द्वारा इस बार भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवाजाही के लिए पुख्ता इंतजामात किए जाये थे। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस फोर्स की तैनात की गई थी।
मंदिर आये भक्तों को श्रीकृष्ण जन्म और पूजन के उपरांत पंजीरी, माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर जे.के. संस्थान के अध्यक्ष श्री अभिषेक सिंघानिया, श्रीमती वर्षा सिंघानिया और समस्त अधिकारी और कर्मचारीगण मौजूद रहे।
कृष्ण लीलाओं के मंचन दर्शकों को करते है आकर्षित
जे.के. मंदिर की जन्माष्टमी सबसे खास बात यहां की झांकी लोगों को बेहद आकर्षित करती है। कानपुर में सबसे बड़ी और आकर्षक जन्माष्टमी की झांकी यह झलक श्रीकृष्ण की पूजा के अतिरिक्त बच्चों द्वारा कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटिका के मंचन जन्माष्टमी से एक दिन पहले से शुरु होते है और श्रीकृष्ण की छठी तक जारी रहते है।
पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3 सितंबर से शुरु होने वाले कृष्ण लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन 9 सितंबर तक होगा। जिसमें श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर बाल लीलाओं के वर्णन के साथ कृष्ण का रुकमणि से विवाह एवं कंस और राक्षसों के वध के नाट्य प्रस्तुतिकरण के साथ श्रीकृष्ण के विराट रुप के दर्शन भी भक्तों को प्राप्त होगें।
श्रीकृष्ण के दर्शन से मनोकामनायें होती है, पूर्ण
मान्यता है कि जे.के. मंदिर में जन्माष्टमी पर दर्शन करने से संतान सुख के साथ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस वजह से दूर दराज के शहरों से भक्तगण अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के श्रीराधा कृष्ण की चौखट पर मथा टेकने आते है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति और श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आंनद लेना चाहते है तो शहर के जे.के. मंदिर जरूर आएं। यहां की भक्ति, आध्यात्म और रोशनी की चमक आपको कृष्णमय बनाने के साथ श्रीकृष्ण आपके सभी कष्टों को हर लेगें।
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