Holi Ganga Mela 2026: होली के एक सप्ताह बाद अनुराधा नक्षत्र में मनाया जाने वाला कानपुर शहर का गंगा मेला विश्व प्रसिद्ध गंगा मेला की श्रेणी में आता है। कानपुर में ऐतिहासिक गंगा मेला मनाये जाने की वजह ये है कि आजादी से पहले सन 1942 में अग्रेंजों के खिलाफ चलाये गये अभियान भारत छोड़ों आंदोलन में क्रांतिकारियों को होली के दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। जिसके उपरांत भारी जन आंदोलन के बाद जब उन्हें सात दिन बाद रिहा किया गया तो उसी खुशी में शहरवासियों ने परमट, सरसैया घाट और रानी घाट पर गंगा किनारे रंग गुलाल उड़ाकर खूब होली खेली जिसके कारण तभी से प्रत्येक वर्ष होली के सात दिन बाद कानपुर शहर में गंगा मेला मनाने का प्रचलन चला आ रहा है। गंगा मेला केवल एक त्योहार नही बल्कि यह हमारे देश की आजादी में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों के बलिदान की कहानी को बखान करता है। कि कैसे उन्होंने अपने तीज त्योहारों की फिक्र न करते हुये हर क्षण देश की आजादी के लिये डटे रहे और देश को आजाद करवा कर वीरगति को प्राप्त हुये।

दिनांक 10 मार्च दिन मंगलवार को कानपुर के विश्वप्रसिद्ध पर्व गंगा मेला के अवसर पर परमट, रानी घाट और सरसैया घाट में सुबह से दोपहर तक ढोल नगाड़ो की थाप पर नाचते गाते लोगों ने भीषण होली खेली और अपने घरों की बालकनी से पानी और रंग उडेला। सायं काल के समय सभी घाटों के किनारे मेले लगाये गये जिसमें बच्चों के लिये खिलौनों की दुकानें सजी और झूले लगे। मेले में नन्हें मुन्नें बच्चें अपने मनपसंद खिलौने खरीदकर और झूला झूलकर खूब मस्ती करते नजर आये।
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