Akshaya Tritiya 2026 : गहने महिलाओं के जीवन के अनमोल रत्नों में आते है। प्रेम के प्रतीक होने के साथ विभिन्न सांस्कृतिक और समाजिक उत्सवों में धारण किये जाने वाले गहने महिलाओं को बेहद प्रिय होते है। गहनों को धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि तो होती ही है। साथ में सकरात्मकता का भाव उत्पन्न करने में गहने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। प्राचीन काल से ही स्त्री हो या पुरुषों भारी मात्रा में गहनों को धारण करने की प्रथायें सदियों से चली आ रही है।
सोना गर्म एंव चाँदी की प्रकृति होती है, ठण्डी
गहने मात्र सजावट और सौदंर्य प्रसाधन नहीं होते है बल्कि यह शरीर को स्वस्थ और काया को निरोगी बनाये रखने में विशेष योगदान देते है। गहनों के विषय में मान्यता है कि सोने की प्रकृति गर्म होती है इसलिये सोना हमेशा शरीर में कमर से ऊपर धारण किये जाने की प्रथा है जबकि चाँदी की प्रवृति ठण्डी होने के कारण इसको कमर और पैरों में धारण करने की प्रथा सदियों से चली आ रही है।

गहनों से बना रहता है, शरीर में ऊर्जा संतुलन
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार यह भी माना जाता है कि सोना माता लक्ष्मी का रुप होती है इसलिये सोने को कमर या पैरों में धारण करना शुभ नही समझा जाता है। सोलह श्रंगार में स्त्रियों की सुन्दरता में चार चाँद लगाने वाले गहनों में प्रत्येक गहने की अपनी अलग कहानी है। कुंडल, मांगटीका, नथ, कगंन, करधनी, अंगूठी, पायल, बिछिया, झुमके और बाजूबंद आदि गहनों को धारण करने से शरीर में रक्त का संचार और ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।
कलाई की चूड़ी रक्त संचार को देती है, बढ़ावा
महिलाओं की कलाई पर सजी चूड़ी रक्त संचार को बढ़ावा देने के साथ हाथों की नसों को सक्रिय रखती है जिससे श्वास सबंधी समस्यायें दूर होने के साथ बौद्धिक क्षमता भी मजबूत होती है। पैर की उंगलियों में धारण की जाने वाली बिछिया हर्मोनल संतुलन को बनाये रखती है जबकि विशेषज्ञों की माने तो पायल हड्डियों और जोड़ों से सबंधित समस्याओं से राहत प्रदान करती है। वहीं हमारे पूर्वज पायल की झनकार को घर में माता लक्ष्मी के आगमन का संकेत समझते थे।
आत्म अभिव्यक्ति की प्रतीक है, नाक की नथ
इसके अलावा साहस और आज्ञा चक्र का प्रतीक माथे का माँग टीका, आत्म अभिव्यक्ति स्त्री सौदंर्य की प्रतीक नाक की नथ, संस्कृति संस्कारों को दर्शाता गले का हार, नकरात्मक शक्तियों को रोकने में सक्षम बांह का बाजूबंद और समृदिॄ का सूचक कमरबंद महिलाओं में सकरात्मकता के भाव को उत्पन्न करने के साथ उनके सौदंर्य में चार चाँद लगा देता है।
गहनों के इन महत्वों को देखते हुये भले ही सोने चाँदी के दाम आसमान को छू रहे हो लेकिन अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर लिवाली में किसी तरह की कोई कमी देखने को नहीं मिली है। अक्षय तृतीया के पावन पर्व के दिन खरीददारों द्वारा लिये गये सोने चाँदी की बिक्री टनों में दर्ज की गयी है।
..समाप्त……..
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