Asha Bhosle: चुरा लिया है, तुमने जो दिल को……..दो लफ्जों की है, दिल की कहानी………. को जीवतंता का रुप देकर अपने सुरों से अमर गीतों की माला पिरों कर 8 सितम्बर 1933 को जन्मी आशा भोसलें जी ने 92 वर्ष की आयु में दुनियाँ से अलविदा कह दिया।
11 अप्रैल को सास लेने में तकलीफ के चलते मुबंई के ब्रीज कैंडी अस्पताल मेंभर्ती कराया गया था। जहाँ पर 12 अप्रैल को उन्होंने अपनी अतिंम सास लेकर जीवन यात्रा पूरी की।
आशा भोसले जी को बचपन से थी, संगीत में रुचि
आशा भोसलें जी को छोटी उम्र से ही संगीत में अपार रुचि थी। मात्र 9 वर्ष की आयु में पिता पण्डित दीनानाथ मंगेश्कर का साया सिर पर से उठ जाने के बाद 10 वर्ष की आयु में ही शिक्षा से विरक्त हो गई। लेकिन उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुये छोटी उम्र से ही गाना शुरु कर दिया था। जिसके बाद 16 वर्ष की आयु में परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर दोगुनी उम्र के गणपत राव भोसले से शादी करने का फैसला उनके जीवन के सफर के लिये बेहद पीड़ादायक रहा।
दोगुनी उम्र के गणपत राव से किया था, विवाह
शादी के उपरांत उनका जीवन और भी ज्यादा संघर्षमय हो गया तीन बच्चों के बाद भी आशा भोसलें जी के वैवाहिक जीवन में उथल पुथल का दौर कायम रहा। जिसके चलते उन्होंने गणपतराव भोसले से तलाक लेने का फैसला लिया। 11 साल की शादी तोड़कर अकेले ही तीनों बच्चों की परवरिश का जिम्मा उठाया और संगीत की दुनियाँ से नाता बनाये रखते हुये अपनी मधुर आवाज से गीतों को बुनती रही।

दशकों की कड़ी मेहनत से उन्होंने 12 हजार से अधिक गानों को अपनी सुरमयी आवाज से अमर कर दिया।
आर्थिक तंगी के चलते बी ग्रेड गानों को भी दिया, सुर
घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी के चलते आशा भोसले जी को शुरुआती दौर में बी ग्रेड फिल्मों के गानों को भी अपने सुरों से सवारना पड़ा जो कि उनके जीवन का बड़ा कठिन दौर था।
1966 में उनकी सुरमयी आवाज की गूंज चरम पर थी उसी दौरान गणपत राव भोसले का निधन के बाद 1980 में आर.डी बर्मन के साथ शादी के बधंन में बंधकर नये जीवन की शुरुआत की। इतने संघर्षपूर्ण जीवनयात्रा के बाद भी लोगों के जीवन को अपने सुरों से सजाने वाली आशा भोसलें जी की सुरीली आवाज का जादू उनके दुनियाँ से जाने के बाद भी संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करेगी।
.समाप्त……..
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