Chaitra Navratri 2026: नवरात्री के छठें दिन माता दुर्गा के छठवें रुप माँ कत्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि देवी कत्यायनी असुरों का नाश करने के लिये महर्षि कत्यायन के तप से प्रकट हुई देवी है, इसीलिये इन्हें कत्यायनी कहा जाता है। चार भुजा धारी सिंह पर सवार माता अपनी भुजाओं में तलवार और कमल को सुशोभित किये हुये है। ऊर्जा और वीरता के प्रतीक लाल रंग के वस्त्र धारण किये माँ कत्यायनी अपने भक्तों के जीवन को साहस, सुख समृद्धि और यश से परिपूर्ण बनाती है।

आज के दिन ज्ञान का प्रतीक येलो कलर, समानता को दर्शाता ग्रे और यश एंव वैभव को प्रदर्शित करता ऑरेंज कलर के वस्त्रों को धारण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। मधुरता की मिठास लिये शहद देवी को बेहद पसंद है। इसलिये शहद, केसर की खीर, केसर की मिठाई और हलवा का भोग लगाने एंव चावल, रोली, कलावा, मंत्रोजप के साथ श्रंगार का समान चढ़ाकर विधि विधान से पूजा करने से देवी कात्यायनी विवाह संबंधित बाधाओं को दूर करते हुये मनोवांछित फल और मनचाहा वर प्रदान करती है।
….समाप्त….

