Chaitra Shukl Navami 2026: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पृथ्वीलोक पर अयोध्या में राजा दशरथ के यहाँ प्रकट्य होने की तिथि चैत्र शुक्ल नवमी को हिन्दू धर्म में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण उपवास रखकर रमायण, रामचरित्र मानस एंव सुंदरकाण्ड पाठ के साथ विधि विधान से हवन पूजन करते है, और प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में सुख समृद्धि आगमन हेतु कामना करते है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा के किनारे बसे कानपुर शहर से श्रीराम और माता सीता का गहरा नाता रहा है। माना जाता है कि अयोध्या त्यागने के बाद माता सीता बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि जी के आश्रम में शरण ली थी।

जिसके उपरांत माता सीता और श्रीराम के पुत्र लवकुश का जन्म हुआ और उनका पालन पोषण, शिक्षा ग्रहण की प्रक्रिया भी आश्रम में पूर्ण हुई थी। महर्षि वाल्मीकि ने यहीं पर प्रसिद्ध महाकाव्य रमायण की रचना की थी। इसलिये शहर कानपुर में चैत्र शुक्ल नवमी धूमधाम से मनायी जाती है।
इस दिन भक्तगण अपने घरों एंव मंदिरों में आयोजित रमायण, रामचरित्र मानस एंव सुदंरकाण्ड आदि की कथाओं के भावों को अपने जीवन में शामिल करते हुये प्रभु श्रीराम, माता सीता और भक्त हनुमान जी के आचरण से सीख लेकर कठिन से कठिन परिस्थितियों में बल, साहस और धैर्य की शिक्षा प्राप्त करते है।
चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर दिनांक 27 मार्च दिन शुक्रवार को शहर के जगत विधाता श्रीराधा कृष्ण जे.के. मंदिर, कमला नगर, कानपुर में अपराह्न 12 बजे से अन्नदान कार्यक्रम की शुरुआत के साथ सायंकाल 5 बजे भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण भगवान की सवारी का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा सायं 7 बजे से मंदिर परिसर के भक्तिमय वातावरण में श्रीराधा कृष्ण के दर्शनों के साथ भक्तगण महाआरती में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त कर सकेगें।
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(भक्तगण लेख में लिखित विचारों को अपने मनोभावों के अनुसार ही ग्रहण करे

