Csjmu Kanpur: आजादी से पहले की पत्रकारिता आसान नही थी पत्रकारों द्वारा हस्त लिखित समाचार पत्रों से पत्रकारिता की शुरुआत आज के AI के युग में Gen ‘Z’ जनरेशन को करती है हैरान ऐसे ही पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े संपादकों और महान् विद्वानों के वक्तव्यों से 12 अप्रैल दिन रविवार को सीएसजेएयू में दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन धूमधाम हुआ। 11 अप्रैल दिन शनिवार से शुरु हुई इस संगोष्ठी का उद्घाटन वि.वि. के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक द्वारा किया गया।
आजादी के पहले समाचार पत्रों की स्थिति से लेकर आज तक के समाचार पत्रों के प्रकाशन के तथ्यों को उजागर करते हुये विभिन्न समाचार पत्रों के संपादकों और विद्वानों ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज की और आज की Gen ‘Z’ जनरेशन को पत्रकारिता की हकीकत से रुबरु कराते हुये उन्हें पत्रकारिता के गुरों से अवगत कराकर बेहतर पत्रकिरता की ओर अग्रसर होने के लिये प्रेरित किया।
AI की चुनौतियों और भारतीय भाषा के मॉडलों पर गहन विचार
हिंदी पत्रकारिता के गौरवमयी 200 वर्षो की यात्रा पर भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन वि. वि. परिसर के सीनेट हॉल में किया गया।

इस संगोष्ठी में पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य, AI की चुनौतियों और भारतीय भाषा के मॉडलों पर गहन विचार विमर्श करते हुये पत्रकारिता के महासंवाद में देश दुनिया के शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं पत्रकारों ने शामिल हुये और आजादी के पूर्व से अबतक की पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर चर्चा की साथ ही संगोष्ठी में छात्र – छात्राओं के शोध पत्र की प्रस्तुत किये गये।
चार सत्रो में आयोजित हुई, संगोष्ठी
चार सत्रो में आयोजित इस संगोष्ठी के पहले सत्र में ऑनलाइन माध्यम से 50 से अधिक छात्र छात्राओं ने पत्रकारिता से जुड़े विषयों का शोध पत्र वाचन किया । जबकि ऑफलाइन माध्यम से 100 से अधिक स्नातक व परास्नातक,शोध छात्र- छात्राओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए ।

कार्यक्रम के अन्य सत्रों के विमर्श सत्र में मुख्य अतिथि रहे वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुये कहा कि हर पांच साल में पत्रकारिता बदलती है कुछ ही समय में पत्रकारिता बहुत तेजी से परिवर्तित हुई है आज के दौर में ऑनलाइन पत्रकारिता के बढ़ते चलन ने पाठको का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रखा है। कार्यक्रम में यूक्रेन से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े ताराश शेव्यचेन्को कीव राष्ट्रीय विश्वविद्यालय यूक्रेन से प्रो.यूरी यूक्रेन में हिंदी की अलख जलाने के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किये। कहा कि वे बच्चों को हिंदी सिखाने के लिए हिंदी फिल्मों और नवाचार का उपयोग करते हुये बच्चों की पत्रिका का उपयोग करते है ।
विद्यार्थी अपने साथ पेन और डायरी अवश्य रखें
कर्यक्रम में मुख्य वक्ता बी बी ए यू लखनऊ से प्रो. गोविंद पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में कानपुर के जुगल किशोर शुक्ल की कलकत्ता में हिंदी की अलख जलाने पर अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि रहे माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.जगदीश उपासने ने कहा कि आज के समय में मोबाइल डाटा सेव करने का साधान बन चुका है लेकिन इसके बवजूद विद्यार्थियों को अपने साथ पेन और डायरी अवश्य रखनी चाहिए जिसमें वह सुनी या बतायी गई सूचनाओं को आसानी से लिख सके। उन्होंने बताया कि एआई की चुनौतियों का सामना करते हुये Gen ‘Z’ जनरेशन को ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की आदत जीवन में आगे बढ़ने के मार्ग को प्रशस्त कर सकती है।
पत्रकारिता का है, विराट इतिहास
कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े मुख्य वक्ता सदस्य सचिव भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली डॉ ओमजी उपाध्याय पत्रकारिता के विराट इतिहास के बारे में अपने विचार प्रकट करते हुये पुराने समाचार पत्रों, पत्रिकाओं पर विशेष चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीएसजेएमयू के प्रति कुलपति प्रो.सुधीर कुमार अवस्थी ने पत्रकारों को सामाजिक सरोकार से पत्रकारिता करने की सलाह दी कहा कि अख़बार के प्रथम पेज पर नकरात्मक खबरों को प्रकाशित न करते हुये सकारात्मक खबरें प्रकाशित करना ज्यादा बेहतर होगा।

इस अवसर पर पूर्व कुलपति दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा प्रो. राममोहन पाठक , बिहार लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो.अरुण भगत,सीएसजेएमयू के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.दिवाकर अवस्थी,डॉ.योगेंद्र कुमार पांडे,डॉ.जीतेंद्र डबराल,डॉ.ओम शंकर गुप्ता,डॉ.रश्मि गौतम,डॉ,हरिओम कुमार,सागर कनौजिया,प्रेम किशोर शुक्ला मौजूद रहे।
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