Kedarnath Dham: तीनों लोकों के स्वामी सृष्टि संहार के लिये प्रकट हुये केदारनाथ में विराजित बैल पर सवार स्वंयभु, विष कंठ में धर बने नीलकंठ, देवी पार्वती के पति उमापति, उग्र रुप में रुद्र, कल्याणकारी शंकर, सबका कल्याण करने वाले शंभू, महान् है, देवाधिदेव महादेव, ब्रह्मांड के स्वामी विश्वेश, त्रिपुरासुर का वध करने वाले त्रिपुरारी यमराज भी कांपे थर-थर वे है कालों के काल महाकाल त्रिनेत्रधारी।
दिनांक 22 अप्रैल दिन बुधवार को केदारनाथ धाम कपाट के खुलते ही 6 माह से राह देख रहे भक्तों की भीड़ शिव रुप स्वंयभु के दर्शन के लिये ललायित हो उठी। बाबा की अद्भुद् छवि का भव्य नजारा भक्तगण अपनी आँखों से अंतरात्मा में समाकर मैं ही शिव हूँ ‘शिवोहम’ का अनुभव पा लेने की चाहत लेकर कतारों में लगे दिखाई दिये।

महादेव के12 ज्योरर्तिलिंग मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर,भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर,काशी विश्वनाथ, वैद्यनाथ, नागेश्वर,रामेश्वरम, घृष्णेश्वरऔर इनमें से एक है रुद्रप्रयाग उत्तराखण्ड में स्थित केदारनाथ धाम। मान्यता है जो भी भक्तगण यहाँ की यात्रा कर लेते है। वह समस्त पापों और कष्टों से मुक्ति पाकर मोक्ष को प्राप्त होते है।
कत्युरी शैली से निर्मित इस मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है यह अद्भुद् मंदिर पाण्डवों के पौत्र महाराजा जन्मेजय ने बनवया था जबकि आदि शंकराचार्य नें मंदिर का निर्माण कार्य करवाया। मंदिर में स्थापित शिवलिंग बेहद प्राचीन है। सदियों पुराने इस मंदिर की बनावट और शक्ति का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि 2013 में आई बाढ़ से मंदिर के आस पास की समस्त इमारते अस्त व्यस्त हो गई थी लेकिन मंदिर जैसा था वैसा ही रहा। उसकी एक ईट भी प्रभावित न हो सकी इस घटना को केदारनाथ धाम के स्वरुप को एक अद्भुद चमत्कार के रुप में देखा गया।
..समाप्त……..
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