World Earth Day: दिनांक 22 अप्रैल दिन बुधवार को संपूर्ण विश्व में पृथ्वी दिवस के रुप में मनाया गया। इसकी शुरुआत 1970 को अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने पर्य़ावरण शिक्षा के तौर पर की थी। पृथ्वी दिवस मनाये जाने का मुख्य कारण यह है कि आने वाली पीढ़ियां वातावरण के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिये जागरुक रहे ताकि पृथ्वी पर बढ़ रहे तापमान और आपदा सबंधी समस्कोयाओं को बढ़ने से रोका जा सके।

ओजोन परत के क्षरण से बढ़ रहा है, तापमाान
पेड़ पौधों का क्षरण होने से पृथ्वी से 20 से 30 किमी की ऊँचाई पर स्थित ओजोन परत प्रभावित हो रही है यह परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकने में सक्षम होती है। लेकिन आज के दौर में भौतिक सुख सुविधाओं के लिये प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण होने से ये किरणें पृथ्वी तक पहुँच कर तापमान को बढ़ा रही है। जिससे लोग कैंसर जैसी तरह-तरह की त्वचा से संबधित ला-इलाज बीमारियों की चपेट में आ रहे है।

वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी चार सतहों से मिलकर बनी है। इनर कोर, आउटर कोर मेंटल कोर और क्रस्ट इसमें पृथ्वी का इनर कोर लोहे और निकिल से बनी सबसे अधिक तापमान वाली ठोस गर्म परत है। जबकि आउटर कोर में सभी धातुयें तरल अवस्था में गर्म गोले के रुप में स्थित है। इसके बाद आता है मेंटल कोर इसमें आधी पिघली चट्टानों से बने हिस्से को मैग्मा कहते है। पृथ्वी पर 71 प्रतिशत जल और लगभग 33 प्रतिशत भाग वनों और पेड़ पौधों से ढका हुआ है। जबकि 29 प्रतिशत भाग पृथ्वी का है जिसमें मानव प्रजाति निवास करती है और समस्त मानव जाति की यह जिम्मेदारी बनती है कि पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा का ध्यान रखे।
..समाप्त………
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