Useful medicine Plant: प्रकृति को पौधों का अमूल्य वरदान प्राप्त है। जहाँ एक तरफ पौधे प्राणियों द्वारा स्त्रावित कार्बन डाईऑक्साइड को ग्रहण करते है वहीं पृथ्वी में वास करने वाले समस्त प्राणियों को ऑक्सीजन देकर जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। जबकि दूसरी ओर तुलसी, पीपल, आवंला, पुदीना और अश्वगंधा जैसे औषधीय गुणों से परिपूर्ण पौधे शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ रखने में सहायक होते है।

खाली पेट तुलसी चबाने से बढ़ती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता
हिन्दू धर्म में तुलसी को सबसे पवित्र पौधे के रुप में पूजा जाता है। तुलसी के पौधे को घर में लगाना रोगों से मुक्ति और सुख समृद्धि के आगमान हेतु अत्यन्त शुभ फलदायी होता है। तुलसी का पौधा बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की श्रेणी में गिना जाने वाला महत्पूर्ण पौधे की पत्ती चाय में डाल कर पीने से चाय स्वादिष्ट तो होती है। इसके साथ खांसी जुकाम सिरदर्द के लिये बेहद लाभकारी जड़ीबूटी का कार्य करती है। विशेषज्ञों की माने तो खाली पेट सुबह तुलसी की पत्तियों को चबाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है।

24 घंटे ऑक्सीजन देता है, पीपल वृक्ष
भारत श्रीलंका और इडोनेशिया में आध्यात्मिक, पर्यावरणीय और औषधीय रुप से लाभ प्रदान करने वाला पीपल वृक्ष का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। इसकी आयु सौ से एक सौ पचास वर्ष तक होती है लेकिन उपवन में लगाये गये वृक्षों की आयु एक हजार वर्ष तक भी हो सकती है। चौबीस घंटे ऑक्सीजन देने वाला विशाल पीपल वृक्ष पर्यावरण में सकरात्मक ऊर्जा प्रवाहित करने, आत्मा को शुदॄ और आत्मज्ञान देने के साथ वायु प्रदूषण को भी कम करने के लिये विशेष महत्व रखता है।
यदि पीपल वृक्ष के औषधीय गुणों की बात की जाय तो इसकी छाल से बनने वाली औषधियां वात्, कफ, पित्त और ह्दय रोगियों के लिये बेहद लाभकारी होती है। इन सभी गुणों से परिपूर्ण पीपल वृक्ष समस्त प्राणियों के जीवन के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

एंटीऑक्सीडेंट्स का विशाल स्त्रोत है, आवंला
आवंला विटामिन सी और बढ़ती उम्र को कम करने मददगार एंटीऑक्सीडेंट्स का विशालतम प्राकृतिक स्त्रोत है। है। रोजना आवंले का सेवन वजन नियंत्रित करने के साथ आँखों की रोशनी एंव रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता है इसमें पायी जाने वाली फाइबर की मात्रा पाचन क्रिया सुचारु रुप से संचालित करने में सहायक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार आवंला इंसुलिन की मात्रा को संतुलित करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है,आंवले का आचार, मुरब्बा, चटनी. पाउडर के रुप में इस्तेमाल कर सकते है। खाली पेट आंवले का जूस भी सेहद के लिये काफी असरदार माना गया है।

गर्मियों के मौसम में अम्रत है, पुदीना
गर्मी के मौसम में पुदीना शरीर में ठण्डक पहुचाने और मन मस्तिष्क को तरोताजा रखने के लिये अम्रत है। पुदीने में कार्बोहाइड्रेट, कोशिकाओं के निर्माण के लिये प्रोटीन, आँखो और त्वचा को स्वस्थ्य रखने के लिये विटामिन ए, सी, हड्डियों की मजबूती प्रदान करने के लिये सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम पोटेशियम एंव हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मददगार आयरन भारी मात्रा में मौजूद होता है।
यह सभी तत्व शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाये रखने के लिये गर्मियों के मौसम में अम्रत साबित होते है। इसके अलावा पुदीना मेन्थोल का प्रमुख स्त्रोत है जिसको दवाईयों, सौंदर्य सामग्री, सिगरेट, पान मसाला आदि में सुगंध लाने के लिये प्रयोग किया जाता है।

एकाग्रता बढ़ाने के लिये रामबाण है, अश्वगंधा
राजस्थान एंव मध्यप्रदेश के जिलो में की जाने वाला अश्वगंधा आयुर्वेद की दृष्टि से बेहद महत्पूर्ण पौधा माना जाता है। इस पौधे की जड़ों में ऐसे गुणकारी एंटीबायोटिक विद्धमान होते है जो ट्यूमर जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ने के लिये भी असरदार होते है। इसके अतिरिक्त अश्वगंधा की जड़ों का उपयोग व्यवसायिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। एकाग्रता बढ़ाने और याददाश्त में तीव्रता लाने के लिये अश्वगंधा प्रकृति का वरदान है।

त्वचा के घाव में असरदार है, एलोवेरा
ऐलोवेरा के पौधे में काटेंदार पत्तों के बीच में जेल की तरह पारदर्शी द्रव भरा होता है। यह जैल स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद लाभकारी और असरदार माना जाता है। इसका इस्तेमाल सौदंर्य प्रसाधन और जलने और कटने पर औषधि के रुप में किया जाता है।
ऐलोवेरा में पाये जाने वाले विटामिन्स और मिनरल त्वचा में ताजगी और निखार लाने के साथ बालो को घना रेशमी मजबूत बनाने में बेहद लाभप्रद होता है। इसके अलावा ऐलोविरा के एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा के दाग धब्बों और कील मुहासों से मुक्ति देने के साथ धूप से झुलसी त्वचा को ठण्डंक प्रदान करते है।

तनाव को कम करती है, ब्राह्मी
ब्राह्मी को दिमाग के लिये इस्तेमाल में लायी जाने वाली बहुमूल्य आयुर्वेदिक औषधि के रुप में जाना जाता है। इसका इस्तेमाल याददाश्त बढ़ाने, तनाव कम करने और एकाग्रता लाने के लिये किया जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को पोषण देकर अनिद्रा, डिप्रेशन, तंत्रिका तंत्र को मजबूती प्रदान कर मानसिक क्षमता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ब्राह्मी की ताशीर ठण्डी होती है जिसके कारण इसका इस्तेमाल डाक्टरों की सलाह पर और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखकर करना चाहिये।
..समाप्त………
(पाठक इस लेख में लिखित तथ्यों को अपने स्वास्थ्य एंव बुद्धिमत्ता के अनुरुप ही अनुसरण करें)


2 Comments
Pingback: भारतीय लोग पसंद बन रही है, ये टॉप 10 कारें - anantpratigyakhabar.com
Pingback: National Flag Adoption Day: देश का तिरंगा 79 वर्ष पूर्व बना,राष्ट्रीय ध्वज - anantpratigyakhabar.com