Bharatanatyam: हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित परंपरागत नृत्य भरतनाट्टयम तमिलनाडू राज्य की 2000 वर्ष पुरानी नृत्य शैली बेहद लुभावनी शैलियों में है। इस शैली में कलाकर रेशमी वस्त्रों को धारण कर सुन्दर जड़ित गहनों से सुसज्जित होकर अपनी भावपूर्ण भंगभंगिमाओं द्वारा कहानी का व्याख्यान कर नृत्य की प्रस्तुति करते है।

नाट्यशास्त्रों में भरतनाट्टयम को कहा गया है, दासियाट्टम
भरतनाट्टयम प्राचीनकाल के देवी देवताओं के मंदिरों में देवदासियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली भाव, राग और ताल के संयोजन के लिये प्रसिद्ध शैली हिंदू परंपरा का एक लौकिक स्वरुप दर्शाती है। प्राचीन नाट्यशास्त्रों में भरतनाट्टयम को दासियाट्टम के नाम से जाना जाता था। शुद्ध तकनीकी पर आधारित धुन, भाव और लय के इस मधुर संगम को 20वीं शताब्दी में भरतनाट्टयम का नाम दिया गया।

श्री स्पंदन में 2000 वर्ष पुरानी शैली पर कलीनिधि ग्रुप का भव्य नृत्य
तमिलनाडू राज्य में विभिन्न तीज त्योहारों और सासंकृतिक, समाजिक कार्यक्रमों में भरतनाट्टयम नृत्य की प्रथा प्रचलित है। इसके अलावा भारत के कई अन्य राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रुप में भरतनाट्टयम का आयोजन किया जाता है।जिसमें हाल ही मे उत्तर प्रदेश राज्य में कानपुर शहर के कमला नगर स्थित श्रीराधाकृष्ण जे.के. मंदिर के 66 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कार्यक्रम श्री स्पंदन के अर्न्तगत कलानिधि ग्रुप के कलाकारों ने मनमोहक भरतनाट्टयम की आत्मिक भव्यमय प्रस्तुति की। जिसमें शहरवासियों के अलावा देश विदेश से आये पर्यटक भी शामिल हुये। जिन्होंने जगत विधाता श्रीकृष्ण के मनमोहक रुप के दर्शन के साथ मंदिर परिसर के भक्तिमय वातावऱण का आनन्द लिया।
…समाप्त….
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