National Flag Adoption Day: आज से 79 वर्ष पूर्व 22 जुलाई 1947 को पिंगली वेंकैया द्वारा बनाये गये तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित कर आधिकारिक रुप से संविधान सभा में अपनाया गया था। एकता, अखंडता देशभक्ति की भावना को समेटे हुये स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की याद दिलाने वाला यह राष्ट्रीय ध्वज आन बान और शान का प्रतीक माना जाता है।
तीन रंगों से निर्मित तिरंगे में केसरिया रंग त्याग और बलिदान, सफेद रंग शांति एंव सच्चाई जबकि हरा रंग समृद्धि का सूचक है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज “तिरंगा” मात्र ध्वज नहीं यह करोड़ों भारतीयों के त्याग, शांति और प्रगति का प्रतीक है।
सूर्योदय और अग्नि का रंग है, केसरिया
देश के राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊपर सूर्योदय और अग्नि का कारक माना जाने वाला केसरिया रंग त्याग और बलिदान का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि मातृभूमि के लिए अपनी प्रिय वस्तु का त्याग करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिये। हिंदू धर्म में निस्वार्थ सेवा दर्शाने वाला साधु-संतों का भी रंग केसरिया है। देशभक्ति की प्रेरणा को प्रकट करता यह रंग उन सभी शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर हम सभी भारतीयों को स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार दिया।

सभी धर्मों के लोगों को एकता के सूत्र में बांधने वाला सफेद रंग हमें बताता है कि बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान शांति और अहिंसा से निकाला जाना ही देश का कर्तव्य है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिये समृद्धि एंव उर्वरता का प्रतीक ध्वजा के सबसे नीचे का हरा रंग धरती की हरियाली, खेती और समृद्धि को प्रदर्शित करता है। इसलिए यह रंग देश की खुशहाली और विकास का प्रतीक माना जाता है। हरा रंग हमें प्रकृति से जुड़ने के साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिये भी संदेश देता है। आशा और तरक्की का प्रतीक यह रंग बताता है कि हमारा देश हर क्षेत्र में आगे बढ़े और प्रगति की ओर अग्रसर हो।
धर्म और गति का प्रतीक है, नीला चक्र
सम्राट अशोक के सारनाथ स्तंभ से लिया गया ध्वजा के बीच में स्थित कानून को प्रदर्शित करने वाला चक्र धर्म और गति को दर्शाता है। सफेद पट्टी पर बना इस गहरे नीले रंग के चक्र में मौजूद 24 तीलियां दिन के 24 घंटों को प्रदर्शित करती हुई प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त रहने की प्रेरणा देती है। जबकि चक्र का नीला रंग आकाश और समुद्र की गहराई और स्थिरता का प्रतीक है।

कुछ मान्यतायें यह भी बताती है कि अशोक चक्र कि 24 तीलियां बौद्ध धर्म के 12 दुख के कारण और 12 गुणों को दर्शाती हैं। प्रत्येक तीली एक गुण को प्रदर्शित करती है जैसे प्रेम, साहस, धैर्य, शांति, दया का प्रतीक माना जाता है। यह चक्र इस बात का सूचक है कि जिस तरह चक्र चलता रहता है, उसी तरह देश को भी निरंतर प्रगति की ओर अग्रसरित रहना है।
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