Gen- Z Jantar-Mantar: जून के अंतिम सप्ताह से शिक्षा में बढ़ती अनियमितता के चलते दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वागंचुक के अनशन प्रदर्शन के बाद से पेपर लीक, भर्ती घोटालों और नौकरी की कमी को लेकर प्रदर्शन की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ना शुरु कर दिया था। लेकिन 20 जुलाई से काकरोच पार्टी और जेन-जी भारी संख्या में दिल्ली जंतर मंतर पर उतरे और प्रदर्शन ने आंदोलन का रुप ले लिया।
जेन-जी जनरेशन की भीड़ प्रदर्शन में इतनी उग्र हो गयी कि यह दूसरे राज्यों तक फैलना शुरु हो गया। जिसमें देश के कई नेता भी शामिल होने लगे सबका सिर्फ एक ही नारा था कि शिक्षा में हो रहे घोटाले, पेपर लीक के मामले बंद हो, भर्ती प्रक्रिया तेज हो और धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा दो।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से स्वीकार किया शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
अतंतः 25 जुलाई को वह दिन आ ही गया जब जेन-जी और काकरोच पार्टी के शिक्षा में अनियमितता, नीट परीक्षा विवाद के उग्र आंदोलन के चलते केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। धर्मेद्र प्रधान ने अपना त्यागपत्र देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी को सौंपा। जिसे देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वीकार कर लिया।

सीजेपी के नेताओं का आरोप था कि नीट, जेईई, टीईटी जैसी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक हो रहे है। जिसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की है। साथ ही खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्ती न किये जाने के कारण युवाओं में भारी आक्रोश था।
सरकार ने एनटीए को भंग करके नई स्वतंत्र एजेंसी बनाने का किया एलान
इस्तीफा देने के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि “मैं देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करता हूं। पिछले कुछ महीनों में पेपर लीक की घटनाओं से मुझे बहुत पीड़ा हुई है। नैतिकता के आधार पर छात्रों के भविष्य को राष्ट्रविरोधी ताकतों से बचाने के प्रयास में मैं अपना इस्तीफ़ा दे रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि नए नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय और मज़बूती से कार्य करेगा। जिसके उपरांत सरकार ने एनटीए को भंग करके नई स्वतंत्र एजेंसी बनाने का एलान किया।
और आज दिनांक 26 जुलाई दिन रविवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का पदभार प्रल्हाद जोशी ने संभाला है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु पेपर लीक संशोधन विधेयक को संसद के विशेष सत्र में पास कराने का फैसला लिया गया। जिसमें पेपर लीक के मामले में दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ के जुर्माने के प्रावधान शामिल है। इसके अलावा आने वाले कुछ महीनों में खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी तेज किये जाने का वादा किया गया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलनकारी सीजेपी और जेन-जी ने इस्तीफे का स्वागत किया मिठाईयां बांटी। सीजेपी संयोजक ने युवा शक्ति की जीत का समर्थन किया। वहीं बीजेपी के नेताओं और समर्थकों ने कहा कि छात्र के हितों को देखते हुये यह नैतिकतापूर्ण कदम है।
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