Kanpur Weather: कानपुर में अगस्त के अंतिम सप्ताह में बारिश ने पिछले दशकों का रिकार्ड तोड़ दिया है। CSA विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार अभी कानपुर में लगातार 2-3 दिनों तक बारिश होने की संभावना है। बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव होने से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके लिये नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव से निपटान के लिये पंप लगाकर पानी निकलवाने की व्यवस्था कर रही है।
लगातार बारिश से कानपुर के कई इलाके बने तालाब
इसके बावजूद लगातार हो रही बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण है। शहर के कई इलाके तालाब बन गये है जिसमें घुटनों तक पानी भरे होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गंगा किनारे बसे लोगों के घरों के अंदर पानी घुस गया है जिसके कारण लोग अपने घरों से नावों में बैठकर बाहर निकलते दिखाई दे रहे है। शहर में 26 अगस्त दिन बुधवार को बारिश का रिकॉर्ड 111.5 मिलीमीटर तक दर्ज किया गया है। यह पिछले कई दशकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश है।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के आंकड़ों के अनुसार 49 वर्ष पहले शहर में इतनी बारिश हुई थी। लेकिन इस बार यह इस मानसून की सबसे अधिक बारिश है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो बीते कुछ दिनों में उत्तर पूर्वी हवाएं तेज गति चल रही है। जिससे बारिश की रफ्तार में भी बढ़ोतरी हो रही है।
जाजमऊ में सड़क धंसने से 18 फीट गहरा गड्ढा
इस बारिश का असर चावला मार्केट, किदवई नगर, गोविंद नगर, काकादेव रावतपुर जैसे कई इलाकों में नजर आ रहा है। जहाँ के नाले पानी से उफना रहे है। बारिश के चलते जाजमऊ में सड़क धंस गई जिससे 18 फीट गहरा गड्ढा हो गया। जिसमें राहगीरों की आवाजाही को रोककर बैरीगेडिंग लगा दी गई है। प्रशासन द्वारा सड़क धंसने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। शहर के कई इलाकों मे लगातार पानी जमा होने के कारण डेंगू और स्वाइन फ्लू के अतिरिक्त गंदे पानी से होने वाले इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है। उर्सला और हैलट के डॉक्टरों के अनुसार जलभराव और बारिश की वजह से इस समय अस्पतालों में गंदे पानी के इन्फेक्शन और मच्छरों से होने वाली बीमारी मलेरिया, डेंगू के मरीजों की संख्या अधिक है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों के लिये लगातार बारिश धान की फसल के लिये फायदेमंद है। इससे धान की बढ़िया उपज होगी। लेकिन ज्यादा बारिश दलहनी और तिलहनी फसलों के लिये नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसके साथ ही खेतो में पानी के जमाव के कारण फसल सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
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