Super Food Makhana: मखाना प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट का भण्डार है। यह देश विदेश में मखाने को रोस्टेड स्नैक्स के रूप में बहुत पसंद किया जाने वाला मखाना डाइटिशियन के अनुसार वजन कम करने एवं हार्ट के लिये बेहद फायदेमंद है। किसानों के लिये तालाब का सोना के नाम से प्रसिद्ध मखाने को फॉक्स नट और गोर्गन नट भी कहा जाता है। इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ के कारण भारत समेत विदेशों और खाड़ी देशों में भी मखाने की मांग अत्यधिक बढ़ रही है।
अब मखाना केवल बिहार की पहचान बनकर नहीं रहा। उत्तर प्रदेश में मखाने की खेती पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी लागू होने के बाद से प्रदेश में भी भारी मात्रा में मखाने की खेती के रास्ते खुल चुके है।
लागत कम और अधिक मुनाफा देती है मखाने की खेती
मखाने की खेती के लिये तालाब, पोखर और निचली जमीन उपजाऊ मानी जाती है। लागत कम और अधिक मुनाफे में मखाने की एक हेक्टेयर में खेती करने पर 15 से 20 क्विंटल कच्चे मखाने की उपज हो सकती है। और यह प्रोसेसिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद लगभग छह से सात क्विंटल रह जाता है। बाजार में अच्छी क्वालिटी के मखाने की कीमत 1000 से 1400 रुपये प्रति किलो तक है। ऐसे में एक हेक्टेयर में खेती करके किसान 4 से 5 लाख रुपये की इनकम आसानी से कर सकता है।
इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ ने यूपी के मखाना किसानों को उन्नत बीज की किस्मों, तालाब बनाने, मखाना को तोड़ने बनाने के लिये मशीनों और निर्यात पर मखाना की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 50% तक सब्सिडी योजना को पूरे प्रदेश में लागू किया। जिसका फायदा मऊ, देवरिया, सीतापुर मिर्जापुर के जलभराव एवं तालाब वाले क्षेत्रों में मखाना की खेती करने वालों किसान उठाकर बेहतर तरीके से मखाने की खेती करने के साथ मखाना को निर्यात करने के उपरांत उचित मूल्य प्राप्त कर सकते है।
किसान मखाना की खेती के लिये सब्सिडी पाने हेतु अपने जिले के कृषि कार्यालय में आधार कार्ड, खतौनी और बैंक पासबुक की कॉपी जमा करके ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकते है।
और योजना का लाभ उठाते हुए अपने ही निवास स्थान के आस पास के क्षेत्रों में मखाने की खेती से जीवनयापन कर सकते है।
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