Devki –Vasudev Vivah देवकी और वासुदेव का विवाह सिर्फ एक वैवाहिक संबंध नहीं था अपितु यह श्रीकृष्ण जन्म की भविष्यवाणी की शुरुआत थी। देवकी वासुदेव के विवाह के समय की भविष्यवाणी की वजह से कंस ने अपनी चचेरी बहन को कारागार में बंदी बनाया और स्वयं को देवकी के आठवें पुत्र कृष्ण से मृत्यु से बचाने के लिए देवकी की सात संतानों को मृत्यु देने का घोर पाप किया लेकिन फिर भी काल से बच न सका। देवकी की आठवीं संतान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद से मथुरा का पूरा भविष्य ही बदल गया।
कहा जाता है कि देवकी मथुरा के राजा देवक की पुत्री और अत्याचारी राजा कंस की चचेरी बहन थी। जबकि वासुदेव राजा सूरसेन के पुत्र और वृष्णि वंश के एक महान् ज्ञानी और पराक्रमी राजा और नंद बाबा के परम मित्र थे। जब देवकी विवाह योग्य हुई तब उनका विवाह वासुदेव के साथ मथुरा नगरी में धूमधाम से संपन्न हुआ।

कंस ने अपनी बहन को विवाह में सैकड़ों हाथी, घोड़े, सोने, चांदी के रथ और दास-दासियां दी थीं। चारों तरफ विवाह की खुशियां मनायी जा रही थी। लेकिन अचानक एक भविष्यवाणी होती है “हे मूर्ख कंस! जिस बहन को तू इतने प्रेम से ससुराल भेज रहा है, उसी का आठवां पुत्र तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। उसी समय अपनी बहन की शादी की खुशियों में डूबे कंस के भाव मातम् में बदल जाते है।
श्रीहरि ने श्रीकृष्ण के रुप को धर लिया जन्म
कुछ कथाओं के अनुसार कंस क्रोध में तलवार निकालकर देवकी को मारने के लिए दौड़ता है। तभी वासुदेव चतुराई और धैर्य के साथ कंस से कहते है। “हे कंस एक स्त्री को मृत्यु देना तुम्हें शोभा नही देता। वासुदेव कंस को देवकी के सभी संतानों को सौंपने का वचन देकर देवकी को कंस द्वारा दी जा रही मृत्यु से बचा लेते है। जिसके बाद कंस देवकी और वासुदेव को कारागार में बंदी बना लेता है। और उनकी एक के बाद एक सभी 7 संतानों को मृत्यु दे देता है।

लेकिन जब आठवीं संतान होने को थी तभी स्वयं श्रीहरि ने जगत के पालनहार श्रीकृष्ण के रुप को धर जन्म लिया। वासुदेव ने अपनी आठवीं संतान को कंस से बचाने के लिए उसे नंद बाबा के घर छोड़ आते है। और नंद बाबा के यहां जन्मी कन्या को ले आते है। जिसके बाद कंस देवकी की आठवीं संतान को भी मृत्यु देने की कोशिश करता है। मान्यता है कि और वह कन्या देवी दुर्गा का रूप धर कर अंतर्ध्यान हो जाती है।
जे.के. मंदिर में जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर देवकी-वासुदेव विवाह का भव्य मंचन
हिंदू धर्म में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनायी जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी देवकी- वासुदेव विवाह की कथा से जुड़ी है। जिसकी वजह से आज हमें श्रीकृष्ण की लीलाओं को देखने के साथ श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने का सौभाग्य प्राप्त करते है।
कानपुर के प्रसिद्ध जे.के. मंदिर में जन्माष्टमी की पूर्व संध्या 3 सितंबर को देवकी वासुदेव के विवाह और भविष्यवाणी की दिव्य कहानी का भव्य मंचन के साथ आरम्भ हुआ। जिसमें जे.के. गुरुकुल द्वारा वेद पाठों से कार्यक्रम की शुरुआत हुई जिसके उपरांत कलाकुंज ग्रुप, वैदिक ग्रुप डांस एडं म्यूजिक और रिदम ग्रुप द्वारा भव्यमय मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई।

जन्माष्टमी की जे.के. मंदिर की पूर्व संध्या भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण दृश्य को दृश्याकिंत करता दिखाई दे रहा था। इस मौके पर मंदिर प्रांगण में जे.के. समूह संस्थान के समस्त अधिकारीगण और कर्मचारियों के साथ भक्तगण मौजूद रहे।

