National Sports Day 2026: खेल की दुनिया के चमकते चाँद के रूप में पहचाने जाने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्म इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। कहा जाता है कि वह रात में चांद की रोशनी में हॉकी का घंटों अभ्यास किया करते थे। जिसकी वजह से उनके साथी खिलाड़ियों ने उन्हें चांद कहना शुरू कर दिया था। उनकी इसी लगन और मेहनत ने उन्हें खेल की दुनिया में हॉकी का जादूगर बना दिया। और उनका नाम ध्यान सिंह से मेजर ध्यानचंद पड़ गया।
मेजर ध्यानचंद 1922 में सिपाही के पद पर ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। लेकिन उन्होंने अपने भीतर के खिलाड़ी को पहचानकर उसे लगातार निखारते रहे। और एक दिन ऐसा आया कि वह खिलाड़ियों के लिये मिसाल बने। उनके जन्मदिवस के दिन को भारत के खेल इतिहास के सबसे स्वर्णिम अध्याय को याद करते हुए 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाया जाने लगा।
कहा जाता है कि बर्लिन ओलंपिक के दौरान खेल अधिकारियों ने उनकी हॉकी स्टिक को तोड़कर यह जानने का प्रयास किया था कि कहीं उनकी हॉकी स्टिक में चुंबक तो नहीं लगा है। जिसके बाद खेल अधिकारियों का यह विचार गलत साबित हुआ था। इसी तरह जर्मनी के तानाशाह ने उनके खेल से प्रभावित होकर उन्हें जर्मनी की सेना में उच्च पद का प्रस्ताव दिया था लेकिन मेजर ध्यानचंद के हृदय में देशप्रेम की भावना इस कदर विद्यमान थी कि उन्होंने उच्च पद के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
युवाओं के लिये प्रेरणा का स्रोत पद्म भूषण 1956 सम्मानित हुये मेजर ध्यानचंद
मेजर ध्यानचंद ने खेल में महान् उपलब्धियां हासिल की थी। जो सभी भारतीयों के गर्वान्वित करती है। उनका गेंद पर नियंत्रण इस कदर था कि गेंद किसी जादू की तरह उनकी स्टिक से चिपकी रहती थी। इन्होंने एम्स्टर्डम में 1928, लॉस एंजिल्स में 1932, बर्लिन में 1936 में भारत गोल्ड मेडल दिलवाये थे। भारत सरकार ने मेजर ध्यानचंद को खेल के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिये 1956 में तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। मेजर ध्यानचंद अनुशासन, समर्पण और खेल की भावना देश के करोड़ों युवाओं के लिये प्रेरणा का स्रोत है। 3 दिसम्बर 1979 को खेल की दुनिया का चांद दुनिया से अलविदा कह गया। लेकिन प्रत्येक भारतीय की धड़कन में आज मेजर ध्यानचंद का जादू कायम है।

खेल के महत्व को देखते हुए यह प्रत्येक उम्र के लोगों के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि आज के समय में भागदौड़ की दिनचर्या और डिजिटल और सोशल मीडिया ने लोगों के जीवन को इस कदर व्यस्त कर रखा है। कि इसका सीधा असर उनकी शारीरिक फिटनेस पर दिखाई देने लगा है। एक जगह बैठे रहने के कारण तंत्रिका तंत्र में रक्त का संचार प्रभावित होने लगता है। जिसका असर सीधा यादाश्त और दिनचर्या पर पड़ता है। इसलिये राष्ट्रीय खेल दिवस हमें विभिन्न प्रकार के खेलों के महत्व से परिचित कराते हुये। खेल को जीवन में महत्वपूर्ण स्थान देने के लिये प्रेरित करता है। खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भारत सरकार मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कारों से सम्मानित करती है।
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