JK Temple Kanpur: अंर्तमन में समाहित सच्चे प्रेम के लिये तो स्वंय ईश्वर भी नतमस्तक है। ऐसा ही श्री राधा कृष्ण का असीम प्रेम भावनाओं से परे है। जब-जब कृष्ण का नाम आया, राधा का नाम उनसे जुड़ा पाया। यही सत्य है जगत विधाता श्री कृष्ण और राधा रानी का प्रेम सृष्टि में आत्मिक प्रेम की प्रतिमूर्ति है।

कलानिधि ग्रुप द्वारा भरतनाट्टयम का आयोजन
राधा कृष्ण मंदिर की चौखट पर कदम रखते ही एक आत्म प्रेमानुभूति का अनुभव होने लगता है ऐसे ही प्रेमपूर्ण दृश्यों प्रतिमाओं से परिपूर्ण कानपुर शहर के प्रसिद्ध जे.के. मंदिर ने आज अपने 66 वर्ष पूर्ण कर लिये है। इस अवसर पर संध्याकाल के समय भगवान की सवारी और रंगारंग कार्यक्रमों में कलानिधि ग्रुप द्वारा भरतनाट्टयम का आयोजन किया गया।

मंदिर संगमरमर कारीगरी एंव वास्तुकला का है, अनुठा मिश्रण
इस मंदिर का निर्माण कार्य 1950 में शुरू हुआ था और 1960 में इसके कपाट भक्तगणों के लिये खोल दिये थे। मंदिर की दीवारों पर सफेद संगममर की कारीगरी और वास्तुकला का अनुठा मिश्रण देश विदेश से आये पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है जबकि शान्त एंव शीतलता पूर्ण वातावरण भक्तों को श्रीराधा कृष्ण की भक्ति की ओर अग्रसरित करके हृदय को प्रफुल्लित कर देता है।
मंदिर परिसर में जारी रहता है, निर्माण कार्य
जे.के. मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार जब मंदिर बनाया जा रहा था तब एक संत आये और उन्होंने कहा था कि मंदिर का निर्माण कार्य हमेशा चलता रहना चाहिये इससे बिना रुकावट तरक्की होती रहेगी। यदि निर्माण कार्य को विश्राम दिया गया तो तरक्की होना बंद हो जायेगी। जिसके कारण पिछले 66 वर्षो से चाहे एक ईट प्रतिदिन लगायी जाये लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य लगातार चलता रहता है।
पंच तत्व का समायोजन सकरात्मक ऊर्जा का है, प्रतीक
मंदिर की दीवारों की नकाशी धार्मिकता एंव एतिहासिक कहानियों को दृश्याकिंत करती है। जबकि वास्तुकला, चारों दिशायें और मंदिर परिसर में पंच तत्व का समायोजन सकरात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है मंदिर के मुख़्य गेट से ही श्रीराधा कृष्ण के भव्य दर्शन होने लगते है।



यह पृथ्वी तत्व है जबकि जल तत्व का आभास फव्वरा कराता है मंदिर की सीढ़ियां अग्नि तत्व एंव अन्दर का स्थान वायु तत्व का एहसास कराता है पाँच शिखरों में सबसे बड़े शिखर में श्रीराधा कृष्ण विराजमान है और श्री लक्ष्मी नारायण, श्री अर्धनारीश्वर (शिव-पार्वती), श्री नर्मदेश्वर महादेव और श्री हनुमान जी भी अन्य शिखरों के नीचे विराजित है।
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