Ethnic Lahenge: शादी में पहने जाने वाले दुल्हन के परिधान का ट्रेंडी लुक दुल्हन की सुदंरता में चार चांद लगाने में अहम भूमिका निभाते है। दुल्हन की पोषाकों में एथनिक, ट्रेडिशनल लहंगें व डिजाइनर्स शादी के जोड़े धारण करने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। आखिर क्यों न हो शादी का दिन ही ऐसा होता है जिसमें सबकी नजर दुल्हन के श्रृंगार और परिधान पर होती है ऐसे में यदि दुल्हन के परिधान और गहने आकर्षक न हो तो देखनें में वह फीकी लगने लगती है। वैसे विभिन्न धर्मो और प्रदेशों में शादी में दुल्हन अलग-अलग तरह के परिधानों को धारण करती है।
ओडिसा में रेशमी साड़ी तो असम में मेखला चादर है, दुल्हन का जोड़ा
केरल में दुल्हन सुनहरी बार्डर वाली सफेद साड़ी, पश्चिम बंगाल में लाल या सफेद रंग की सिल्क साड़ी, ओडिसा में रेशमी साड़ी, असम में मेखला चादर, तमिलनाडु में कांजीवरम सिल्क साड़ी, पंजाबी दुल्हन लाल लहंगा और पटियाला सूट, कश्मीर में जरी वर्क गाउन, बिहारी दुल्हन पीले रंग की साड़ी, महाराष्ट्र में दुल्हन मराठी अंदाज में धोती जबकि गुजरती दुल्हन अपनी शादी में पानेतर धारण करती है।
लेकिन उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है यहाँ की दुल्हन द्वारा अपनी शादी में ज्यादातर लाल, मेहरुन, गुलाबी रंग के जरकन जडित सुनहरी कढ़ाई का लहंगा चोली धारण करने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। दुल्हन की करीबी सहेलियां और रिश्तेदार भी सुन्दर जरकन वाले लहंगे को विशेष अवसर पर धाऱण करती है।
पेस्टल, रफल्ड और बनारसी लहंगों का है, ट्रेंडी लुक
फैशन के अंदाज से कमर पर फिट ए- लाइन, घेरदार फ्लेयर्ड, घुटनों तक फिट फिर फ्लेय्रड फिशटेल और जैकेट स्टाइल लहंगे के साथ जैकेट काफी समय से दुल्हन के परिधानों में शामिल है। लेकिन आज के दौर में पेस्टल, रफल्ड शराराकट के साथ बनारसी लहंगों का प्रचलन ज्यादा है। यह आम तौर पर शादियों और पार्टियों में दुल्हन के अलावा उनकी सखी सहेली खूब शौक से पहनती है। यदि इनमें रंगों की बात की जाय तो मौसम के मिजाज को देखते हुये आँखों को ठण्डक देने वाले हल्के रंग और दुल्हन के लिये ब्राइडल रंग के हल्के और फैंसी लहंगे बेहतरीन विकल्प है।
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