Mogra Flower: मन मोहक सुगंध लिये गर्मियों और बरसात के मौसम में खिलने वाले बेला के फूल समस्त देवी देवताओं के अलावा भगवान शिव, श्रीकृष्ण, हनुमान जी, श्रीहरि और देवी पार्वती को अतिप्रिय है।
बेला के फूलों का ज्यादातर इस्तेमाल पूजा पाठ भगवान के श्रृंगार, सजावट, गहने, गजरा, इत्र, दवायें आदि बनाने के अतिरिक्त अरोमा थेरेपी के लिये बेहद लाभदायक होता है। बाग बगीचे और घरों की छतों पर लगे बेला के पौधों से निकले सफेद रंग के सुन्दर फूलों की मनमोहक सुगंध से वातावरण सकरात्मक ऊर्जा से परिपूर्णऔर सुगंधित बना रहता है।

बेला के फूल से बनते है, श्रृंगार के लिये सुन्दर आभूषण
देवी देवताओं के श्रृंगार के लिये मुकुट, कुडंल गले का हार आदि सुन्दर आभूषण बनाने में बेला के फूल बहुतायत प्रयोग में लाये जाते है। इसके अलावा बालों में गजरा, चोटी में गुथकर वेणी के रुप में बेला के फूल का इस्तेमाल महिलायें अपने साजो श्रृंगार के लिये भी करती है।
घर आगन को महका देने वाले यह फूल शादी पार्टियों की सजावट से चार चाँद लगाने वाले बेला के ताजे फूलों को पानी में उबाल कर चंदन के तेल से तैयार सुगंधित इत्र का उपयोग रुम फ्रेशनर और बॉडी स्प्रे के रुप में प्रयोग से मन प्रसन्न रहता है।

अरोमाथेरेपी के लिये लाभदायक है, बेला
फिजियोथेरेपिस्ट की माने तो अरोमाथेरेपी में बेला के फूल बेहद लाभदायक सिद्ध होते है। इन सुगंधित फूलों को सुंघने और इससे प्राप्त ऑयल को त्वचा पर इस्तेमाल से तंत्रिका तंत्र के माध्यम से इसकी खुशबू मन मस्तिष्क में पहुँचती है। जिससे तनाव से मुक्ति, मानसिक शांति और स्ट्रेस कम होता है।
इस प्रकार देखा जाय तो बेला का फूल सभी मायनों में मात्र एक फूल नहीं बल्कि प्रकृति का दिया अनमोल रत्न है, जिसका इस्तेमाल साजो श्रृंगार से लेकर कीमती औषधियों को निर्मित करने के लिये किया जाता है।
..समाप्त….
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