Independence Day 2026: “वंदे मातरम्” आजाद भारत देश के प्रत्येक नागरिक के ह्दय में बसा राष्ट्र गीत अभिमान और बलिदान की कहानी को बखान करता है। यह पूरे भारत के अभिमान को अपने में समाहित “वंदे मातरम्” दो शब्द जिसका अर्थ है “हे मातृभूमि, मैं तुम्हें वंदन करता हूं” ये गीत देशभक्तों को अपनी मातृभूमि और संस्कृति के लिये समर्पित प्रेम को दर्शाता है।
देश की आन, बान और शान के प्रतीक इस राष्ट्र गीत के इतिहास 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा संस्कृत और बांग्ला भाषा में लिखे जाने से शुरु हुआ। क्रांतिकारियों के मन में आजादी की अलख जलाने वाला यह गीत 1882 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आंनद मठ में प्रकाशित किया।
1896 को “वंदे मातरम्” को रवींन्द्र नाथ टैगोर ने गाया था
जिसके उपरांत 1896 को “वंदे मातरम्” को रवींन्द्र नाथ टैगोर ने सर्वप्रथम कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया था। स्वतंत्रता आंदोलनकारियों के लिये यह गीत जान बन गया था। जब आंदोलनकारी “वंदे मातरम्” गीत गाते हुये ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नारे लगाते थे। तब ब्रिटिश सरकार इस गीत की आवाज सुनते ही कांप उठती थी। क्योंकि यह गीत युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाता था। देश का प्रत्येक नागरिक “वंदे मातरम्” गीत में भारत को अपनी माँ के रुप में देखते नजर आता था।
1905 में बंग-भंग आंदोलन में क्रांतिकारियों ने बनाया था, नारा
बंग-भंग आंदोलन 1905 में क्रांतिकारियों ने इसे अपना नारा बनाया। और भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद जैसे वीर क्रांतिकारी “वंदे मातरम्” गीत को गाते हुए फांसी पर झूल गये। इस गीत की दूसरी पंक्ति सुजलाम सुफलम् मलयज शीतलम्, शस्य श्यामलम् मातरम्” जिसका अर्थ है- “मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं मां। तुम जल और फलों से भरी हो, सुगंधित हवा सी शीतल हो, हरे-भरे खेत खलियानों वाली हो।
त्याग भावना और एकता का प्रतीक है, “वंदे मातरम”
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। जिसके बाद से विभिन्न स्कूल कॉलेजों की प्रार्थना सभाओं एंव कार्यक्रमों के साथ खेल प्रतियोगिताओं में इस गीत को गाया जाता है। और यह गीत सभी जाति धर्म को एक सूत्र में बांधते हुये सभी देशवासियों को यह याद दिलाता है कि देश सबसे पहले है।
“वंदे मातरम” गीत भावना, त्याग, एकता और देशभक्ति का पथ पर समस्त भारतीयों को अग्रसरित करता है। इसलिये जब तक भारत रहेगा, तब तक प्रत्येक भारतीयों के दिलों में “वंदे मातरम” गीत गूंजता रहेगा।
1971 अधिनियम संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम् विधेयक’ पारित
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान के रोकथाम अधिनियम 1971 में संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम् विधेयक’ 2026 संसद में पारित हो गया है। जिसमें राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” को राष्ट्रगान “जन गण मन” के समान कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है।
जिसके तहत अधिनियम 1971 में संशोधन किया गया है। इस कानून के अतंर्गत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर “वंदे मातरम” गीत को बजने से रोकता है या गायन में बाधा डालता है। तो उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करते हुये तीन वर्ष की सजा जुर्माना या दोनों से दण्डित किये जाने का प्रावधान शामिल किया गया है। अब किसी भी कार्यक्रम में पहले राष्ट्रगीत और फिर राष्ट्रगान दोनों का प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। इससे संबंधित मंत्रालय ने प्रोटोकाल भी जारी कर दिये गये है।
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