Naag Panchami 2026: हिन्दू धर्म में प्रत्येक त्योहार के पीछे कोई न कोई धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक कारण छिपा होता है। ऐसे ही त्योहारों में नाग पंचमी का त्योहार बेहद लोकप्रिय है इसे सावन मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार नाग देवताओं की पूजा के लिए समर्पित है। नागों का वंश सृष्टि में करोड़ों वर्ष पूर्व माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नाग देवता ऋषि कश्यप और कद्रु की संतानों के रूप में सर्वप्रथम नाग विकसित हुये। देवी देवताओं के युग से नागों का अस्तित्व माना गया है।
नागों के राजा है, (अनंत) शेषनाग
भगवान विष्णु क्षीर सागर में माता लक्ष्मी के साथ हजारों सिर वाले नागों के राजा (अनंत) शेषनाग की शैय्या पर विराजमान है। जबकि भगवान शिव द्वारा गले में धारित नाग वासुकी ने मंद्राचल पर्वत से समुद्र मंथन में सहायता की थी। विशालकाय नागों में पद्म नाग समृद्धि के आगमन का प्रतीक माना जाता है। अश्वतर और कम्बल नाग स्वास्थ्य एवं सुख के कारक माने जाते है। इन नागों का वर्णन महाभारत काल से मिलता है।
कर्कोटेश्वर शिवलिंग में समाहित है, कर्कोटक नाग
धृतराष्ट्र नाग को वासुकी नाग का वंशज और शंखपाल नाग को दिव्य नागों की श्रेणी में रखा गया है। शंखपाल की पूजा शुभ फल देने वाली होती है। पिगंल नाग को महाभारत काल के शक्तिशाली नागों में शामिल किया गया है। इनकी पूजा करने से डर भय का नाश होने के साथ धन आगमन होता है। पिगंल नाग को धन संरक्षक के रुप में भी पूजा जाता है।
Naag Panchami (AI Generated Photograph)श्रीकृष्ण के द्वारा कालिया को परास्त और जनमेजय यज्ञ की कथा
एक कथा के अनुसार कालिया यमुना नदी में निवास करने वाला विषधारक नाग था। जिसे जगतविधाता श्रीकृष्ण ने परास्त किया और यमुना नदी छोड़ने का आदेश दिया। जिसके बाद से यमुना नदी विषमुक्त हो गयी थी।

वहीं जनमेजय यज्ञ कथा में पताल लोक के सबसे शक्तिशाली, क्रोधी नाग तक्षक ने राजा परीक्षित को डस लिया था। जिसके उपरांत राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने नाग वंश के समाप्त करने के उद्देश्य से जनमेजय यज्ञ कराया। जिससे यज्ञ की अग्नि में नाग स्वयं ही भस्म होना शुरु हो गये थे। जिसके उपरांत राजा आस्तिक और वेद व्यास ने जनमेजय यज्ञ को पूर्ण नहीं होने दिया। और नाग तक्षक और नागों की कई अन्य प्रजातियां समाप्त होने से बच गयी थी।
नाग कुंडलिनी शक्ति, समय चक्र का है, प्रतीक
वेदों एवं पौरणिक कथाओं के अनुसार नाग कुंडलिनी शक्ति, समय और चक्र का प्रतीक माने जाते है। नागपंचमी के पावन अवसर पर नागों के मुख्य कुलों की विधि विधान से पूजा अर्चना का प्रावधान प्राचीन काल से चला आ रहा है। इस दिन महिलाएँ व्रत रखकर घर के दरवाजे पर गोबर या मिट्टी से नाग-नागिन की आकृति बनाकर, दूध, हल्दी, चावल और फूल चढ़ाकर पूजन करते हैं।
नागपंचमी के अवसर पर नागों के वंशजो को दूध पिलाना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ व्यक्ति के जीवन सुख समृद्धि के आगमन के साथ पाप और भय का नाश भी होता है। इस प्रकार नागपंचमी हमें प्रकृति से प्रेम और जीवों के सम्मान का संदेश भी देती है।
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(नोटः इस लेख में लिखित तथ्यों को पाठक अपने मनोभावों के अनुरुप ही ग्रहण करें। इसमें लिखित तथ्य प्राप्त जानकारी मात्र है)
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