Nirjala Ekadashi 2026: वर्ष में 24 एकादशी मनायी जाती है। इसमें प्रत्येक मास में दो एकादशी व्रत शुक्ल पक्ष और दूसरी एकादशी कृष्ण पक्ष में रखे जाते है। लेकिन जब अधिक मास लगता है तो एकादशी के व्रत एक वर्ष में 24 की जगह 26 हो जाते है।
जुलाई में योगिनी और दिसम्बर में उत्पन्ना एकादशी
2026 में जून माह से लेकर दिसम्बर तक एकादशी तिथियों की बात की जाये तो इनमें जून माह में निर्जला एकादशी, जुलाई में योगिनी, देवशयनी एकादशी, अगस्त में कामिका, श्रावण पुत्रदा एकादशी, सितंबरअजा, परिवर्तिनी एकादशीअक्टूबरमें इंदिरा एकादशी, पापांकुशा एकादशी, नवम्बर में रमा, देवोत्थान एकादशी, दिसंबर में उत्पन्ना एकादशी और मोक्षदा एकादशी के व्रत से श्रद्धालुओं के समस्त दुख दूर होने के साथ जीवन में सुख समृद्धि के और भाग्य की वृद्धि होती है।

निर्जला एकादशी से मिलता है,पूरे वर्ष की एकादशी व्रत का पुण्य
आज दिनांक 25 जून दिन गुरुवार को ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी को हिन्दू धर्म में विशेष स्थान दिया गया है। माना जाता है कि पूरे वर्ष की एकादशी का पुण्य मात्र निर्जला एकादशी के विधिविधान से व्रत करने से मिल जाता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इसको भीमसेनी एकादशी कहे जाने का एक कारण यह भी माना जाता है। कि भीम भूखे नही रह सकते थे जिसके कारण श्रीहरि ने उनको निर्जला एकादशी का व्रत करने के लिये कहा और यह वरदान दिया कि सभी एकादशी के व्रत के पुण्य की प्राप्ति निर्जला एकादशी का व्रत करने से हो जायेगी।
श्रद्धालु इस दिन श्रीहरि को पसंददीदा भोग लगाकर विधिविधान से पूजा अर्चना करें तो उनकी समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। साथ ही इस दिन मौसमी फल, शरबत अन्न वस्त्र आदि का दान विशेष फलदायी भी माना जाता है।
..समाप्त………


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