Janmashtami 2026: उद्योगों की नगरी कानपुर शहर के घंटाघर के स्टेशन पर कदम रखते ही यदि श्रीराधा कृष्ण का नाम जुबां पर आते ही जे.के. मंदिर की याद आती है। आखिर क्यों न हो इस भव्य मंदिर की नींव शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति सिंघानिया परिवार के जुग्गीलाल कमलापत द्वारा वर्ष 1953 में रखी गई थी। वर्ष 1960 में इस मंदिर के द्वार आम जनता के लिए खोल दिये गये थे।
लगभग 7 वर्षो में बनकर तैयार होने के बाद सुंदर वास्तुकला की अनोखी छटा को अपने भीतर समायें मंदिर की कारीगरी के झरोखों से होते श्रीराधा कृष्ण के दर्शन मानों कानपुर शहर की धरती पर शांत और हरियालीमयी शुद्ध वातावरण में अंतर्मन को भक्ति और आध्यत्म से परिपूर्ण करने वाली भावना उत्पन्न होने लगती है।
अद्भुत वास्तुकला ऊँचे शिखर के नीचे विराजित श्रीराधाकृष्ण
पाँच शिखरों की अद्भुद वास्तुकला मंदिर में कदम रखने वाले प्रत्येक भक्त को अपनी ओर आकर्षित करती है जिसमें सबसे ऊँचे शिखर के नीचे विराजमान श्रीराधाकृष्ण। और बाकी के चार शिखरों के नीचे लक्ष्मी नारायण, अर्धनारीश्वर, नर्मदेश्वर, और हनुमान जी स्थापित है। प्राचीन और आधुनिकता से परिपूर्ण शैली का सुंदर तालमेल देखने को मिलता है। इसकी बनावट जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश पंच तत्वों को अपने में समाहित किए हुये है।

छतों और दीवारों की नक्काशी प्राचीन शैली को प्रदर्शित करती है। जबकि स्वच्छ पानी की झीलें चांद की मनोरम रोशनी में हरी-भरी प्रकृति को स्वयं में समेटे हुई सी प्रतीत होती है।
मंदिर की नकाशी में भारतीय संस्कृति और कला का समावेश
मंदिर को बनावाने का उद्देश्य मात्र भक्ति और आध्यात्म तक सीमित नही था। बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और आधुनिक सोच का प्रतीक धर्म और मानवता भी उद्देश्यों में शामिल थी। वैसे तो पूरे वर्ष मंदिर में त्योहारों और खास मौकों पर भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। लेकिन जब बात हो जगत विधाता श्रीकृष्ण के जन्म यानि जन्माष्टमी की तो यहां पर महीनों पहले से तैयारिया शुरु हो जाती है।
इस वर्ष 2026 की जन्माष्टमी के कुछ दिन ही शेष रह गये है और प्रत्येक वर्ष भांति इस वर्ष भी मंदिर की भव्य छटा श्रीकृष्ण के जन्मदिन के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं भक्तिभाव से भर देगी। इसके लिए जन्माष्टमी के अवसर पर महा आरती के साथ विभिन्न भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

3 सितंबर से 9 सितंबर तक के कार्यक्रमों में वासुदेव विवाह, पूतना, वकासुर, अधासुर राक्षसों का वध, महारास, गोवर्धन एक्ट, कंश वध, श्रीकृष्ण राज्यभिषेक, श्रीकृष्ण रुकमणि विवाह, श्रीकृष्ण सुदामा मिलन और द्रोपदी चीर हरण, श्रीकृष्ण के विराट रुप के दर्शन और 9 सितम्बर को श्रीमद्भगवद् गीता उपदेशों के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के कार्यक्रमों का समापन होगा।
जे.के. मंदिर कानपुर के मध्य में स्थित होने के कारण भक्तों को यहाँ तक पहुँचना बेहद आसान है। कानपुर रेलवे स्टेशन से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर तक जाने के साधन के तौर पर ऑटो, ई रिक्शा आदि के साथ रावतपुर तक मेट्रो आदि की सुविधायें भी उपलब्ध है।
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