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    Home » तुम हो तो आईना है, वरना कौन दिखा सकता था सूरते जमाने को…….

    तुम हो तो आईना है, वरना कौन दिखा सकता था सूरते जमाने को…….

    International Women’s Day 2026
    Preeti RathoreBy Preeti RathoreMarch 8, 2026Updated:March 8, 2026 देश No Comments3 Mins Read
    International Women's Day
    International Women's Day
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    International Women’s Day 2026: आज 8 मार्च दिन रविवार को संपूर्ण विश्व महिला दिवस के रुप में माना रहा है। महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के लिये ये कविता बिल्कुल सत्य है। तुम हो तो आईना है, तुम न होती तो कौन दिखा सकता था, सूरते जमाने को……..बदलते दौर के साथ संपूर्ण विश्व को महिलाओं ने अपनी बुद्धिमत्ता और प्रखरता से निखार रखा है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सन 1975 से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सार्वभौमिक रूप से शुरूआत की गई थी। सर्वप्रथम महिला दिवस 28 फरवरी 1909 को न्यूयार्क नगर में फरवरी के अन्तिम रविवार को मनाया गया था। जुलियन कैलेंडर के अनुसार फरवरी सन 1917 का अन्तिम रविवार 23 फरवरी को था। जबकि उस दौर में संपूर्ण विश्व में ग्रेगेरियन कैलैंडर प्रचलन में था जिसके मुताबिक 23 फरवरी को 8 मार्च था। इसी वजह से 8 मार्च महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में महिला दिवस को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिया गया।

    आज के दौर में घर हो या समाज, नौकरी हो या व्यापार हर क्षेत्र में महिलायें अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने में पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल रही है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि इस समाज में आज भी कुप्रवृति के लोग और कुछ कुप्रथाएं ऐसी भी प्रचलित है जो महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनने के क्षेत्र में बाधा उत्पन्न करती है। लेकिन इन सभी को पार करती हुई महिलायें आगे बढ़ती है और विकसित समाज का निर्माण करती है।

    International Women's Day......
    International Women’s Day……

    आज आजाद देश की महिलायें अपनी आजादी को प्राथमिकता देते हुये देश की रक्षा के लिये तैनात सेना का नेतृत्व करने वाली कमांडर से लेकर विद्यार्थियों को ज्ञान देने वाली शिक्षिका के अलावा घर एंव समाज की जिम्मेदारियों को निभाने वाली नारी की अहम् भूमिका निभाती नजर आती है। महिलाओं का यही दृढ़ संकल्प और क्षमता देश और समाज को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है।

    हमारे देश में ऐसी महिलाओं के कई उदाहरण है जिन्होंने अशिक्षित समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाकर पिछड़ेपन की जंजीरों से मुक्त कराया है। भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने बालिका विद्यालय की स्थापना करके महिलाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति के नये अवसर प्रदान किये। जबकि फातिमा शेख ने सावित्री बाई फूले के साथ मिलकर शिक्षा की अलख जलाकर भारतीय नारी आंदोलन की नींव रखी। बेगम रुकैया सखावत हुसैन ने मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा के लिये संघर्ष किया तो सुधा मूर्ति ने बुनियादी शिक्षा को मजबूती प्रदान करके महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। वसुधा कामत भारत की शिक्षा सुधार के लिये जानी गई और संगीता राव ने विशेष शिक्षा को बढ़ावा दिया।

    ……समाप्त……..

     

    India International Women’s Day 2026
    Preeti Rathore
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    पिछले 14 वर्षो से पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ी हूँ। समाचार लेखन, विज्ञापन स्क्रिप्ट लेखन, आध्यात्मिक लेख लिखने के अलावा पत्रकारिता के शिक्षक के रुप में कार्य किया है। मैनें सीएसजेएमयू कानपुर से एम.जे.एम.सी, एम.एस.सी, बी.एड, एल.एल.बी,अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र हिन्दी विषय में परस्नातक एंव राजर्षि टण्डन मुक्त वि.वि. से पीजीडीएमएम की डिग्री प्राप्त की है। मैं अपनी वेबसाइट (Anantpratigya खबर) में पाठक वर्ग को सत्य और स्पष्ट जानकारी से सबंधित खबरें देने हेतु प्रयासरत् रहूँगीं।

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