Vat Savitri Vrat: सत्यवान और सावित्री की कथा सदियों से पतिव्रत पत्नि का अपने प्रिय के लिये समर्पण भाव की गाथा का गुणगान करती है। वट सावित्री व्रत पतिव्रत पत्नि के मन में अपने पति के प्रति ईश्वरीय भाव जाग्रत करने वाला मात्र व्रत नहीं यह हिंदू धर्म की नारी को शक्ति रुप में प्रदर्शित करने वाला पावन पर्व है। इस पर्व का अर्थ यह माना जा सकता है कि यदि सतित्व स्त्री प्रण कर ले तो वह यमराज को भी हारने पर मजबूर कर सकती है।

दिनांक 16 मई दिन शनिवार को संपूर्ण हिंदू धर्म की सुहागिन महिलायें अपने प्रिय के स्वास्थ्य और लम्बी उम्र की कामना पूर्ति के लिये व्रत ऱखा। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखे जाने वाले इस व्रत में अभिजीत मुहूर्त को विधि विधान से पूजा अर्चना का सबसे शुभ समय माना गया जिसमें सुहागिन महिलायें सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष (बरगद वृक्ष) को दूध जल अर्पित करने के उपरांत 7 परिक्रमा करते हुये वट वृक्ष पर कच्चा सूत बांधा। इसके बाद सावित्री और सत्यवान की कथा सुनकर अपने लिये अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करते हुये मौसमी फलों के साथ सुहाग सामग्री का भी दान किया।
…समाप्त……
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