-ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा दान की गई 60 किलों चाँदी का भी रिकार्ड गायब
-वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज से पैरोल पर थे 6 आरोपी
-वर्षो के ऑडिट एसआईटी के जांच के दायरे में
‘Ram Mandir’ Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर घोटाले मामले में रमाशंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रमा शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव सभी आरोपी आउटसोर्सिंग है। ये सभी कर्मचारी ट्रस्ट या ट्रस्ट से सबंधित सदस्य़ नहीं थे। इन कर्मचारियों को 35 से अधिक दान पेटियों के नगद की गिनती, दान में आये हुये सोने, चाँदी, हीरे के गहनों आदि के रख रखाव और उन्हें बैंक में जमा करने का कार्यभार सौंपा गया था। लेकिन आरोपियों ने 39 दिनों में 70 बार चोरी की घटना को अंजाम दिया।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार ये 70 घोटाले 27 अप्रैल से 5 जून के बीच हुये है जिनके सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किये गये है। जिसमें एआरपी वाउचर घोटाले में असल कैश से कम एंट्री को दिखाया गया था और बाकी के अंतर का चढ़ावा इन आरोपियों द्वारा गबन कर लिया गया था। इसमें इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा दान की गई 60 किलों चाँदी की भी कोई रशीद, और यूटिलाइजेशन की एंट्री नही है। इसके अलावा मंदिर में अन्य भक्तों द्वारा सोने चाँदी, हीरे के चढ़ावे के गहनों के दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां पायी गयी। साथ ही आरोपियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट किये गये।
मंदिर में इन कैश काउंटर पर रखे गये कर्मचारियों की नियुक्ति पर भारी लापरवाही जतायी गयी थी। इनमें आठ में से 6 आरोपी वाराणसी की 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' के पैरोल पर थे। काउंटिंग स्टाफ का कोई ड्रेस कोड नही था। ट्रस्ट की सिफारिश पर भी इनमें से कुछ लोगों को नौकरी दी गई थी। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा ने अपने साले लवकुश मिश्रा की नौकरी लगवाई थी।
एसआईटी रिपोर्ट में एक अनऑफिशियल मैनेजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहा है जो मंदिर से जुड़े सभी निर्णय लेता था। इनमें एक ड्राइवर भी शामिल है एसआईटी ने कैश काउंटर स्टाफ, बैंक प्रतिनिधि, ट्रस्ट हैंडलर समेत राम मंदिर गबन घोटाले में शामिल मुख्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की तैयारी शुरु कर दी है। और इसके साथ मंदिर के पिछले 5 वर्षो के ऑडिट भी एसआईटी के जांच के दायरे में है। ..समाप्त........
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