Rudrabhishek: सावन माह में रुद्राभिषेक को विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिषशास्त्रों के अनुसार ‘ॐ नमः शिवाय’, “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्” , “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।। आदि मंत्रों का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को उनके मनपसंद पदार्थो से अभिषेक करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते है। ज्ञान, शक्ति एंव भक्ति को विकसित करके मनोवांछित फल प्रदान करते है।
भगवन शिव का जल से जलाभिषेक, दूध से दुग्धाभिषेक, घी से घृताभिषेक शक्कर से शर्कराभिषेक और पुष्प से पुष्पाभिषेक आदि पदार्थो से रुद्राभिषेक करने से अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है।
तेज, ओजस्व प्राप्ति के लिये करें घृताभिषेक
पापों का नाश करने के लिये भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक किया जाता है। जल के अभिषेक से सुख शांति की प्राप्ति होती है साथ ही जल चन्द्रमा का कारक होने शांति और पवित्रता का प्रतीक भी होता है।

दूध से अभिषेक से आयु, आरोग्य और सौभाग्य की वृद्धि होती है जबकि दही से अभिषेक भगवान शिव सन्तान प्राप्ति के योग बनाते है। तेज और ओजस्व प्राप्ति और विजय हासिल करने के लिये भगवान शिव को घी से अभिषेक करते है। वाणी मे मिठास और सौम्यता लाने के उद्देश्य से शहद से अभिषेक किया जाता है। फल और इत्र से अभिषेक से जीवन में सुख समृद्धि में वृद्धि के साथ वातावरण में सकरात्मकता का भाव उत्पन्न होता है। जीवन में यश कीर्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिये सावन में पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करना बेहद लाभकारी होता है।
इसके अलावा देवों के देव महादेव कहे जाने वाले आदिदेव मात्र एक लोटा जल और बेलपत्र में ही प्रसन्न हो जाते है।“सत्व,रजस और तमस” को प्रदर्शित करती तीन पत्तियों की बेलपत्र भोलेनाथ को अतिप्रिय है। यह शिव की तीन शक्तियां है।
5,100 बेलपत्रों से हुआ जे.के. मंदिर में सावन के प्रथम सोमवार को अभिषेक
सावन का सोमवार हो या सावन के महीने का कोई भी दिन सभी भगवान शिव को अतिप्रिय है। लेकिन सावन के सोमवार का महत्व इसलिये बढ़ जाता है क्यों कि सोमवार का दिन भोले का दिन है, और सावन के सोमवार को सोमवारी कहे जाने वाले दिन में बेहद शुभ योग बनाते है।
JK Temple, Kamla Nagar, Kanpur.
इसलिये रुद्राभिषेक के लिये सावन के सोमवारी को सबसे उपयुक्त माना जाता है। सावन के प्रथम सोमवार को शहर के विभिन्न मंदिरों में रुद्राभिषेक के मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना की गयी। जिसमें शहर के प्रसिद्ध जगत विधाता श्रीराधाकृष्ण जे.के. मंदिर में विशेष पूजन और भव्य रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया।
इस विशाल रुद्राभिषेक में 11 आचार्यो द्वारा 5,100 बेलपत्रों के साथ भगवान शिव को प्रिय दूध, दही, घी, शहद, फूल आदि अर्पित किये गये।
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“ (नोटः इस लेख में लिखित तथ्य विभिन्न सूत्रों से जानकारी मात्र हैं।, श्रद्धालुओं को अपने मनोभावों के अनुसार ही ग्रहण करना चाहिये।)


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