CSJMU Kanpur: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय होता जा रहा है। AI आज के युवा वर्ग की जरुरत बन चुका है। मशीनों को मानव की तरह सोचने समझने की क्षमता की यह अद्भुद प्रक्रिया है।
AI के इस्तेमाल से आजकल स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यवसाय और कई अन्य क्षेत्रों में प्रगति देखी जा सकती है। AI एक तरह से कम्प्यूटर साइंस है जो मशीनों में मानव जैसी सोचने समझने की क्षमता को विकसित करती है।
नैरो एआई विशिष्ट ट्रेनिंग के तहत करता है, कार्य
AI को दो रुपो में कार्य करते हुये देखा जा सकता है। नैरो एआई इसे ANI के नाम से जाना जाता है। इसको एक तयशुदा और विशिष्ट कार्य की ट्रेनिंग दी जाती है उसी के अतंर्गत यह कार्य करता है। यह मानव की तरह सोच समझ नही सकता और सीमित दायरे के अंदर ही कार्य करता है।
ANI कार्यो में आवाजों के निर्देश, चेहरे की पहचान करने आदि को शामिल किया गया है। इसमें मोबाइल का फेस लॉक सिस्टम, कम्प्यूटर पर खेला जाने वाला शतरंज गेम, यूट्यूब और नेटफ्लीक्स के रिकमेंडेशन आदि नैरो एआई के अंतर्गत आते है।
जबकि जनरल इंटेलिजेंस इसे AGI के नाम से जाना जाता है। यह मानवों की तरह किसी भी कार्य को सीख और समझ सकता है।
एआई के बढ़ते स्कोप को ध्यान में रखते हुये सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन पर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के तत्वाधान में 7 और 8 अगस्त एआई पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

डॉ0 होइमावती तालुकदार देगीं मीडिया में AI उपकरणों की जानकारी
कार्यशाला के समन्वयक और पत्रकारिता एंव जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 दिवाकर अवस्थी के अनुसार कार्यशाला के पहले दिन सामग्री निर्माण के लिये एआई की संभावनाओं पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसमें सह समन्वयक डॉ0 होइमावती तालुकदार मीडिया में लेखन के लिये एआई उपकरणों की जानकारी देगीं।
मीडिया में जरुरी एआई उपकरण एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका विषय पर आधारित इस कार्यशाला में एआई के माध्यम से लेखन, शोध के अलावा रिपोर्टिंग, वीडियो निर्माण, सोशल मीडिया औऱ तथ्यों की जांचों के बारे में विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा।
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