Hariyali Teej 2026: सावन की हरियाली और पीपल, बरगद के पेड़ों की डालो पर पड़े झूले लहलाती फसलों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली सुगंध मानो प्रकृति देवी पार्वती सृष्टि संहारक भगवान शिव से मिलन के लिये सोलह श्रृंगार में सज धज कर हरे वस्त्रों में प्रकट्य हुई है। कुछ ऐसा ही मनोहरी वातावरण सावन में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज के अवसर पर देखने को मिलता है। प्रकृति और हरी भरी हरियाली से गहरे संबंध को दर्शाता महिलाओं के लिये यह त्योहार बेहद उमंग भरा होता है।
देश भर में हरियाली तीज जिसे श्रवण तीज के नाम से भी जाना जाता है। बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है। मान्यता है माता पार्वती भगवान शिव को पति रुप में प्राप्त करने के लिये 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। जिसके बाद सावन माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तृतीया को उनकी तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रुप में स्वीकार किया था। इसलिये सुहागिन महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अपने पति की लम्बी उम्र की कामना के लिये यह व्रत बड़े विधिविधान के साथ रखती है।

जबकि कुंवारी कन्यायें सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिये यह व्रत करती है। हरियाली नाम से साफ तौर पर जाहिर होता है कि यह प्रकृति और वातावरण का मोहक संगम है। सावन के मौसम में बारिश की बूंदे और पक्षियों की चहचहाट चारों तरफ हरियाली इस त्योहार की प्रमुख पहचान है।
वहीं झूले, लोकगीत और मेहंदी के बिना हरियाली तीज अधूरी मानी जाती है। इसलिये गांव और शहरों में पीपल और बरगद के वृक्षों पर रंग-बिरंगे झूले डाले जाते हैं। महिलाएं समूह में झूला झूलती हुई “कजरी”, “बारहमासा” और तीज के लोकगीत गाती हैं।
हरियाली तीज पर हरे वस्त्रों में महिलाओं ने किया सोलह श्रृंगार
हरियाली तीज व्रत में एक दिन पहले सिंगारा का रस्म की जाती है। जिसमे सास अपनी बहू को हरे वस्त्र, चूड़ियां, मेहंदी, मिठाई और श्रृंगार का सामान देती है। जिसको हरियाली तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर स्नान के उपरांत वस्त्रों को धारण कर हरी चूड़ियां, मेहंदी, गहनों आदि से सोलह श्रृंगार करती है।

व्रत रखने वाली महिलाएं पूजन में मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें भगवान शिव माता पार्वती को कार्तिकेय और गणेश जी के साथ स्थापित कर बेलपत्र, फूल, अक्षत, धूप-दीप, मिठाई, घेवर, मालपुए और मीठे चावल का भोग लगाकर विधिविधान के साथ पूजा अर्चना करती है। और तीज की कथा सुनने के बाद रात्री के समय चंद्रमा को देखकर व्रत खोलती है। व्रत खोलने वाली महिलाओं के लिये हरी सब्जियां और हरा भोजन करना भी शरीर को ठंडक पहुँचाने के उद्देश्य से लाभप्रद होता है।
यूपी के कई जिलों में फूलों और रंगबिरंगी रोशनी से सजे मंदिर
राजस्थान और यूपी में हरियाली तीज का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार में शिव परिवार की राजसी झांकियां सजा कर निकाली गई। यूपी के कानपुर, लखनऊ, मथुरा और वृंदावन आदि मंदिरों को फूलों और रंगबिरंगी रोशनी से सजाये जाने के साथ कानपुर शहर के जगतविधाता श्रीराधा कृष्ण का प्रसिद्ध जे.के. मंदिर में आयोजित भावार्पण कार्यक्रम में बाल कलाकारों ने भव्यमय प्रस्तुति से समा बांधा। मंदिर आये भक्तगण भव्यमय प्रस्तुति देखकर भावविभोर हो उठे।

हरियाली तीज प्रेम, समर्पण प्रकृति से जुड़ाव का त्योहार
हरियाली तीज धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति से जुड़ने के पर्व के रुप में भी मनाया जाता है। इस मौसम में पेड़-पौधे लगाने, वृक्षों की पूजा करने और पर्यावरण को हरा भरा बनाये रखने का अवसर प्राप्त होता है।
मान्यता है कि प्राचीन काल में महिलाएं हरियाली तीज के अवसर पर वनों में जाकर पेड़ पौधों की पूजा किया करती थी और प्रकृति से अपने जीवन में सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करती थीं। आज के दौर में भी कई स्थानों पर सावन और हरियाली तीज के अवसर पर “वृक्षारोपण” अभियान चलाए जा रहे है। यह त्योहार प्रेम, समर्पण और प्रकृति से जुड़ाव के साथ रिश्तों में गहराई और एकजुटता का भाव उत्पन्न करता है। और हरियाली को जीवन के अभिन्न अगं के रुप में प्रदर्शित करता है।
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(नोटः इस लेख में लिखित तथ्यों को पाठक वर्ग अपने मनोभावों के अनुरुप ही ग्रहण करें। इसमें लिखित तथ्य प्राप्त जानकारी मात्र है। किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से नहीं लिखे गये है)
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