Mother’s Day: लोरी सुनाती, आंचल में छुपाती, हर दर्द सहकर सीने से लगाती, रोये हम तो आँखे है, उसकी भर आती, ऐसा होता है माँ का प्यार, प्रकृति ने दिया मां की ममता का अनमोल उपहार।। मां शब्द मात्र शब्द नहीं इस शब्द में पूरा ब्रह्मांड समा जाता है। यह प्रकृति का दिया ऐसा तोहफा है जिसकी गोद में आकर हम खूबसूरत दुनियां को देख पाते है और अपने सभी दुखों को पल भर में भूल जाते है। आज दिनांक 10 मई दिन रविवार को माँ के निस्वार्थ प्रेम के लिये समर्पित संपूर्ण विश्व मातृ दिवस के रुप में माना रहा है।

10 मई 1908 को मनाया गया था, पहला मातृ दिवस
सर्वप्रथम अमेरिका की एना मारिया जार्विस ने अपनी माँ के मरणोपरांत उन्हें श्रद्धाजंलि देने के उद्देश्य से पहला मातृ दिवस 1908 को मनाया था। आश्चर्य की बात यह कि 1908 में मनाये जाने वाले पहले मातृ दिवस की तिथि भी 10 मई थी और 2026 में भी 10 मई को संपूर्ण विश्व मातृ दिवस मना रहा है। प्रत्येक वर्ष माँ के निस्वार्थ प्रेम के लिये समर्पित यह पावन दिन मई के द्वितीय रविवार को मनाया जाता है।

ईश्वर अपने अंश रुप में आत्मा देता है, तो माँ देती है शरीर
माँ का रिश्ता ईश्वर के समान पूजनीय होता है। यदि ईश्वर हमारे शरीर में अपने अंश के रुप में आत्मा देता है। तो माँ अपने अंश से शरीर का निर्माण करती है। जिसके उपरांत हम जीवन का जीवंत अनुभव करके प्रकृति द्वारा प्रदान किये गये सुख सुविधाओं का आंनन्द लेने के लिये सक्षम होते है।

आज मातृ दिवस के खास दिन को धूमधाम से मनाया इस अवसर को लोगों ने त्याग प्रेम की मूरत अपनी माँ को उनके मनपसंद डिजाइनर्स कार्ड और तोहफे देकर सेलिब्रेट किया।
..समाप्त……..
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