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    न सर पर है पगड़ी, न तन पर है जामा कह दो कन्हैया से नाम है, सुदामा

    Friendship day 2026
    Preeti RathoreBy Preeti RathoreAugust 2, 2026Updated:August 2, 2026 देश 1 Comment4 Mins Read
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    Friendship day 2026: देवकी नन्दन यशोदा के लल्ला, राधा के प्रियतम, रुकमणि के नाथ, अर्जुन के गुरु, बलराम के भ्राता और सुदामा के मित्र वे है, जगतविधाता श्रीकृष्ण। न सर पर है पगड़ी, न तन पर है जामा कह दो कन्हैया से नाम है, सुदामा।। आज 2 अगस्त दिन रविवार को लोग मित्रता दिवस के रुप में माना रहे है। एक सच्चा मित्र जीवन की वह पूंजी है जिसको दुनियां की समस्त दौलत देकर भी नही पाया जा सकता है। कुछ ऐसी ही सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता भी थी। जन्म से लेकर श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक धर्म और न्याय के लिये महाभारत के युद्ध में अपने कुल का नाश और एक युग का अंत होते देखा।

    श्रीकृष्ण देखते है, रिश्तों में प्रेम और समर्पण

    माना जाता है कि श्रीकृष्ण द्वारा शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा लेकर लड़े गये महाभारत युद्ध की वजह से कुरुक्षेत्र की मिट्टी आज भी सुर्ख लाल है। इन सबके बावजूद श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से जुड़े प्रत्येक रिश्ते को औपचारिकता की जगह प्रेम, समर्पण और आत्मीयता को महत्व दिया। राधा से प्रेम और सुदामा से मित्रता का रिश्ता उनके आत्मिक भाव का सबसे बड़े परिचायक है। जिसके लिये दुनियाँ आज भी उनकों अपना आदर्श मानकर पूजती है। और प्रत्येक वर्ष मित्रता दिवस के अवसर पर सबसे पहले श्रीकृषण और सुदामा की मित्रता को याद करती है।

    श्रीकृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनी के आश्रम में एक साथ शिक्षा ग्रहण की थी। और शिक्षा पूर्ण होने के उपरांत श्रीकृष्ण द्वारिका में जा बसे और सुदामा अपने गृहस्थ जीवन में व्यस्त हो गये।

    सुदामा गुरुकुल में एक साथ शिक्षाकरते थे ग्रहण करते थे

    सुदामा का गृहस्थ जीवन बेहद दयनीय था। वह गांव में अपनी पत्नी सुशीला के साथ कच्ची झोपड़ी में रहते थे। मान्यता है कि जब सुदामा और श्रीकृष्ण गुरुकुल में पढ़ने के लिये जाते थे। तब गुरुमाता ने सुदामा को खाने के लिये चने दिये थे। लेकिन वह चने ऋषि दुर्वसा द्वारा श्रापित थे। और यह बात सुदामा जानते थे जिसके कारण सुदामा ने सारे चने स्वंय खा लिये थे।

     और वह गरीब हो गये और उनके पास जीवनयापन के लिये सुख-साधन नहीं बचे। एक दिन जब सुदामा और उनकी पत्नी ने नगर के लोगों को द्वारिका के राजा श्रीकृष्ण के बारे में चर्चायें करते सुना तब सुदामा की पत्नी सुशीला ने कहा कि आपके मित्र द्वारिका के राजा है। उनके पास जाकर कुछ मदद मांग लीजिये।

    अपनी पत्नी द्वारा बार –बार कहे जाने के बाद सुदामा ने श्रीकृष्ण के पास जाने का निर्णय लिया। जैसे ही सुदामा श्रीकृष्ण की नगरी द्वारिका पहुँचते है। द्वारपाल उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा देते  देते है। तभी सुदामा अपना परिचय द्वारपाल को देकर बोलते है श्रीकृष्ण से कह दो उनके बचपन के मित्र सुदामा आये है। द्वारपाल महल में जाकर श्रीकृष्ण को सुदामा का परिचय देते है। श्रीकृष्ण अपना सिहांसन छोड़ कर सुदामा से मिलने के लिये ललायित होकर दौड़े चले आते है। और सुदामा को महल में ले जाकर उनके चरण अपने हाथों से धोकर पोछते है।

    दो मुट्ठी चावल में किये श्रीकृष्ण ने दो लोक सुदामा के नाम

    तभी श्रीकृष्ण ने सुदामा के हाथ में एक पोटली देखकर बोले भाभी ने मेरे लिये क्या भेजा है। सुदामा उस पोटली को छिपा लेते है। तभी श्रीकृष्ण बचपन में गुरुमाता द्वारा चने को अकेले खाये जाने की बात को कहकर पोटली ले लेते है।  और उसमें से चावल निकाल कर खाने लगते है। जब दो मुट्ठी चावल खा चुके होते है तभी तीसरी मुट्ठी में रुकमणि उनका हाथ पकड़ लेती है और चावल खाने से रोक देती है। बोलती स्वामी आपने दो मुट्ठी चावल खाकर अपने मित्र के नाम दो लोक कर चुके है। तीसरी मुट्ठी चावल खाने के बाद आप तीसरा लोक भी अपने मित्र के नाम कर देगें तो हम सब कहाँ जायगें।

    रुकमणि की बात को सुनते ही श्रीकृष्ण रुक जाते है। और कुछ देर बाद सुदामा अपने द्वारिका से अपने गांव की ओर निकल पड़ते है। और इस सोच में पड़ जाते है कि वह अपनी पत्नी सुशीला से क्या कहेगें कि उनके बचपन के मित्र श्रीकृष्ण ने उन्हें खाली हाथ लौटा दिया। और जैसे ही सुदामा अपने गांव पहुँचते है। झोपड़ी की जगह महल और द्वारिका जैसी रौनक देख कर अंचभित हो जाते है। और समझ जाते है श्रीकृष्ण ने बिना मांगें ही उन्हें सब कुछ दे दिया। श्रीकृष्ण और सुदमा की मित्रता से यह सीख मिलती है कि मित्रता का स्थान बिना किसी भेदभाव के सर्वश्रेष्ठ है। मित्रता में गरीबी अमीरी जैसे भावों का कोई स्थान नही है।

    समाप्त……….

    ये भी पढ़ेः स्वयंभु है, द्वादश ज्योतिर्लिंग

    ( पाठक इस लेख में लिखित तथ्य अपने मनोभावों के अनुरुप ही ग्रहण करें। इसमें लिखित बाते किसी की धार्मिक भावना के ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से नही लिखी गयी है। इसमें लिखित तथ्य  जानकारी मात्र है) 

    Friendship day 2026 India
    Preeti Rathore
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    पिछले 14 वर्षो से पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ी हूँ। समाचार लेखन, विज्ञापन स्क्रिप्ट लेखन, आध्यात्मिक लेख लिखने के अलावा पत्रकारिता के शिक्षक के रुप में कार्य किया है। मैनें सीएसजेएमयू कानपुर से एम.जे.एम.सी, एम.एस.सी, बी.एड, एल.एल.बी,अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र हिन्दी विषय में परस्नातक एंव राजर्षि टण्डन मुक्त वि.वि. से पीजीडीएमएम की डिग्री प्राप्त की है। मैं अपनी वेबसाइट (Anantpratigya खबर) में पाठक वर्ग को सत्य और स्पष्ट जानकारी से सबंधित खबरें देने हेतु प्रयासरत् रहूँगीं।

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