Arti of God: पूजा पाठ के अवसरों पर भगवान की आरती उतारने को विशेष महत्व दिया गया है। इसके पीछे धार्मिक कारणों के अतिरिक्त वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी विद्यमान है।
यदि धार्मिक कारणों की बात की जाय तो शास्त्रों में लिखा है कि “आर्त हरणं इति आरती” मतलब जो आपके दुख और आर्त को हरे, वो आरती है। ईश्वरीय आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिये दीया (अग्नि), जल और फूल (पृथ्वी), शंख (आकाश). और चंवर(वायु) 5 तत्वों की आरती उतारने को शामिल किया गया है। इसमें श्रद्धालु ईश्वर को समस्त ब्रह्मांड का सार अर्पित करते हुए ईर्ष्या, पाप, रोग, दोष को दूर करने की प्रार्थना करता है।
शंख, घंटी और थाली की ध्वनि एकाग्रता को है, बढ़ाती
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाय तो आरती में उपयोग में लाये जाने वाले घी, कपूर, धूप और हवन सामग्री आदि से वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया का नाश होता है, जिससे हवा शुद्ध होती है। शंख, घंटी और थाली को बजाने से निकलने वाली विशेष प्रकार की ध्वनि व्यक्ति के दिमाग को तरोताजा और मन को शांत रखती है। साथ ही नकारात्मक विचारों का दूर करके एकाग्रता को बढ़ाती है।
जबकि मनोवैज्ञानिक दृष्टि से दीये में प्रज्ज्वलित रोशनी को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसरित होने का साधन माना गया है। अंधकार को दूर करने के लिये दीया जलाकर भगवान की आरती की जाती है। इसके अलावा मान्यता है कि ईश्वर केंद्र है और आरती को गोल-गोल घुमाने से श्रद्धालु की पूरी जिंदगी ईश्वर के चारों तरफ घूमती रहती है। जबकि आरती को हाथों से आंखों पर लगाने से आरती में समाहित ईश्वरीय आशीर्वाद श्रद्धालु अपने हृदय में उतार लेता है।
और प्रार्थना करता है कि ‘हे ईश्वर जिस प्रकार इस दीये में प्रकाश है, उसी तरह हमारे भीतर के अंधकार और दुखों को दूर कर हमारे जीवन में भी प्रकाशमय बनाये रखें।
जे.के. मंदिर में सैकड़ों भक्त हुये महा आरती में शामिल
महा आरती में अधिकाधिक संख्या में पुजारी और भक्तगण शामिल होते है। यह केवल पूजा नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के लिये एक दिव्य अनुभव की प्राप्ति है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महा आरती में शामिल होने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सावन के पावन माह के अवसर पर श्रीराधारानी और जगत विधाता श्रीकृष्ण का भव्य जे.के. मंदिर कमला नगर, कानपुर में दिनांक 22 अगस्त दिन शनिवार को महा आरती का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्तगण शामिल होकर ईश्वर से समस्त प्राणियों के जीवन में सुख, समृद्धि के आगमन और रोशनी से भर देने की प्रार्थना की। जिससे सावन माह के हरियालीमयी छटा को स्वयं में समाहित किये मंदिर प्रांगण का वातावरण दिव्यमयी सायंकाल की महाआरती से भावविभोर हो उठा।
समाप्त…..
(इसमें लिखित तथ्यों को श्रद्धालु अपने मनोभावों के अनुरुप ही ग्रहण करें। लिखित तथ्य प्राप्त जानकारी मात्र है)
ये भी पढ़ेः Kiwi Fruit: “चाइनीज गूसबेरी” (कीवी) खाये इम्यूनिटी बढ़ाये

